समाचार चैनल पर हमले की राजनीतिक दलों ने निंदा की
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, "समाचार चैनल ने देशवासियों की आंखें खोल दी है कि संघ के कार्यकर्ता किस प्रकार आतंकवादी घटनाओं में संलिप्त हैं। वे किस प्रकार और कैसे योजना बना रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "सच्चाई सामने आ गई तो वे लोग हिंसा पर उतारू हो गए। ये फासीवादी लोग हैं। इन पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।"
लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के अध्यक्ष रामविलास पासवान ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए आरएसएस पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की। उन्होंने कहा, "अरएसएस का यही चरित्र है। उस पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। जब सिमी पर प्रतिबंध लग सकता है तो आरएसएस पर क्यों नहीं।"
कांग्रेन नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, "बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है यह हमला लेकिन यह आश्चर्चजनक नहीं है। असहिष्णुता और हिसक प्रदर्शन आरएसएस का चरित्र है। मैं सरकार से मांग करता हूं कि फासीवाद को मजबूत करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्ती से निपटा जाए।"
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रवक्ता डी. पी. त्रिपाठी ने कहा, "आरएसएस देश में नफरत फैलास रहा है और इससे देश में आतंकवाद फैल रहा है। साध्वी प्रज्ञा और साध्वी ऋतम्भरा भी आतंकवादी हैं। इस हमले की जांच होनी चाहिए और इस निंदनीय कार्रवाई के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।"
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि यह यह लोकतंत्र पर हमला है। मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला है। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी राम माधव ने इस घटना को जायज ठहराते हुए कहा, "तोडफोड़ की कोई योजना नहीं थी। हमारी योजना केवल धरना देने की थी।" उन्होंने आरोप लगया कि किसी राजनीतिक दल के दवाब में संघ व उसके नेताओं को बदनाम करने की योजना के तहत समाचार चैनल द्वारा दुष्प्रचार किया जा रहा है। इसका विरोध करने के लिए कुछ लोग वहां पहुंचे थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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