इसरो इस वर्ष और उपग्रह प्रक्षेपित करेगा

वेंकटचारी जगन्नाथ

श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), 12 जुलाई (आईएएनएस)। सोमवार को पांच उपग्रहों को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित करने के बाद भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी, इसरो ने कहा कि वह इस वर्ष और उपग्रहों का प्रक्षेपण करेगी। इसके साथ ही दो भारतीयों को अंतरिक्ष की कक्षा में भेजने के प्रयास जारी हैं।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन के.राधाकृष्णन ने यहां कहा, "हम जीएसएलवी (जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लांच व्हिकल) रॉकेट के जरिए एक संचार उपग्रह जीसैट-5 का प्रक्षेपण करेंगे। दूसरा प्रक्षेपण दूर संवेदी उपग्रह, रिसोर्ससैट-2 का होगा। यह प्रक्षेपण पीएसएलवी (पोलर सैटेलाइट लांच व्हिकल) रॉकेट के जरिए किया जाएगा।"

राधाकृष्णन, उन्नत उच्च दृढ़ता के साथ मानचित्र तैयार करने वाले उपग्रह, काटरेसैट-2बी सहित पांच उपग्रहों को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किए जाने के बाद संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे।

राधाकृष्णन ने कहा, "अगला पीएसएलवी रॉकेट कई उपग्रहों को लेकर अंतरिक्ष में जाएगा। इनमें रिसोर्ससैट-2 और दो छोटे उपग्रह शामिल होंगे।"

इसरो के अधिकारियों के अनुसार संगठन के पास पीएसएलवी को तैयार करने के लिए सभी उप प्रणालियां हैं। प्रक्षेपण इस वर्ष अक्टूबर के पहले किया जाना है।

विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक पी.एस.वीराघवन ने कहा, "जीएसएलवी रॉकेट के तैयार करने का काम बुधवार से शुरू हो जाएगा और प्रक्षेपण सितंबर के आखिर में या अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में किए जाने की संभावना है।"

इसरो की मानवसहित मिशन योजना के बारे में राधाकृष्णन ने कहा कि अंतरिक्ष एजेंसी ने दो मनुष्यों को सात दिनों तक कक्षा में रखने का खाका तैयार किया है।

इसरो के तरल प्रणोदन प्रणाली केंद्र के निदेशक एस.रामाकृष्णन ने कहा, "मानवसहित मिशन के लिए हमें मानव को ले जाने के लिए कक्षीय कैप्सूल-माड्यूल की जरूरत होगी। यानी अंतरिक्ष यात्रियों हेतु किसी आपात स्थिति के लिए जीवन रक्षक प्रणाली और बचाव प्रणाली की आवश्यकता होगी। प्रणालियों की डिजाइन तैयार की जा रही है और परिकल्पना की समीक्षा की जा चुकी है।"

रामाकृष्णन ने कहा, "पहले चरण में कक्षीय व्हिकल की डिजाइन तैयार की जाएगी। डिजाइन तैयार हो जाने के बाद इसे एक पीएसएलवी रॉकेट के जरिए प्रक्षेपित कर इसका मूल्यांकन किया जाएगा। मूल्यांकन से हमारा आत्मविश्वास बढ़ेगा। इस रॉकेट के लिए जरूरी वैमानिकी बहुत जटिल है और इसे विकसित किया जाना है।"

दूसरा चरण, मानव उड़ान मिशन के लिए एक नया लांच पैड और अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण केंद्र तैयार करना है।

सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक एम.सी.दाथन ने कहा, "मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए जरूरी नए लांच पैड और अन्य सुविधाओं के लिए 1,000 करोड़ रुपये के परिव्यय की जरूरत होगी।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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