खाद्य श्रृंखला को प्रभावित कर सकती हैं अवसाद-निरोधी दवाएं
'अक्वेटिक टॉक्सीकोलॉजी' जर्नल में एक नए शोध के हवाले से कहा गया है कि अवसाद-निरोधी दवा फ्लूऑक्जीटाइन के संपर्क में आने पर झींगों के व्यवहार में बदलाव आता है और उनके जीवित रहने की संभावना कम हो जाती है।
पोर्ट्समाउथ विश्वविद्यालय के 'इंस्टीट्यूट ऑफ मरीन साइंसेज' के अध्ययनकर्ता एलेक्स फोर्ड कहते हैं, "कड़े खोल वाले जानवर खाद्य श्रृंखला के लिए महत्वपूर्ण हैं और यदि समुद्र में अवसाद-निरोधी दवाओं के स्तर के चलते झीगों का प्राकृतिक व्यवहार बदल रहा है तो इससे पारिस्थितिक तंत्र का प्राकृतिक संतुलन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।"
अध्ययन में पाया गया है कि जब झींगे नदियों में बहने वाले अपशिष्ट पदार्थो में मौजूद फ्लूऑक्जीटाइन के संपर्क में आते हैं तब भी उनके व्यवहार में समान बदलाव देखे जाते हैं।
विश्वविद्यालय द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रभावित झींगों में प्रकाश से दूर तैरने की बजाए प्रकाश की ओर तैरने की प्रवृत्ति पांच गुना बढ़ जाती है, इससे उनके मछलियों व पक्षियों द्वारा खाए जाने का खतरा बढ़ जाता है और इस तरह से खाद्य श्रृंखला प्रभावित होती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications