अमेरिका के खिलाफ 'जंग' में सिपाही हूं: शहजाद (लीड-2)

समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार 30 साल के शहजाद को मैनहटन की संघीय अदालत में गुरुवार को जनसंहारक हथियारों के इस्तेमाल का प्रयास करने सहित 10 मामलों में आरोपी बनाया गया था। सोमवार को उसने इन सभी आरोपों को कबूल कर लिया। अगर इस मामले में शहजाद को दोषी करार दिया जाता है तो उसे उम्रकैद की सजा हो सकती है। उसे अक्टूबर में सजा सुनाए जाने की संभावना है।

न्यायाधीश मिरियम गोल्डमैन केडरबॉम से शहजाद ने कहा, "यह समझना होगा कि मैं कहां से ताल्लुक रखता हूं। मैं खुद को एक मुस्लिम सिपाही मानता हूं। मैं सौ बार अपने जुर्म कबूल करना चाहता हूं।"

गत एक मई को शहजाद ने टाइम्स स्क्वे यर के निकट कथित तौर पर अपने वाहन में बम विस्फोट करने का प्रयास किया था। इसके दो दिन बाद ही उसे न्यूयार्क के जॉन एफ. कैनेडी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था। वह अमेरिका से भागने की कोशिश में था।

खबरों में कहा गया है कि गिरफ्तारी के बाद से ही शहजाद ने अधिकारियों से सहयोग करना आरंभ कर दिया था। अदालती सुनवाई के दौरान शहजाद ने खुलासा किया कि उसने वाहन में तीन बम रखे थे लेकिन विस्फोट नहीं हो सका।

उसने कहा, "यह एक जंग है। अमेरिका मुस्लिम देशों और मुसलमानों में आतंक फैला रहा है और मैं इसकी प्रतिक्रिया का एक हिस्सा हूं। मैं इसीलिए हमले कर रहा हूं। अमेरिका सिर्फ अपने लोगों की परवाह करता है। दुनिया में दूसरी जगहों पर लोगों के मरने की उसे कोई परवाह नहीं है। उस पर आगे भी हमले होंगे।"

अमेरिका के एक एटार्नी जनरल एरिक एच. होल्डर जूनियर ने एक बयान में कहा कि अगर शहजाद अपने मकसद में कामयाब हो गया होता तो बड़ी तबाही हो सकती थी। उन्होंने कहा कि अब उसे उसके किए की सजा मिलेगी।

न्यायाधीश केडरबॉम के लिए यह मान लेना मुश्किल था कि इतने बड़े हमले का प्रयास शहजाद अकेले ने किया था। उन्होंने शहजाद से बार-बार पूछा कि क्या उसकी किसी ने मदद की थी? इसके जवाब में उसने हर बार 'नहीं' कहा। शहजाद ने इतना जरूर स्वीकार किसा कि उसे पाकिस्तान के तालिबानियों की ओर से 12,000 डॉलर मिले थे।

शहजाद ने कहा कि उसके निशाने पर आम लोग थे क्योंकि वे ही सरकार चुनते हैं और उसकी नजर में सभी जिम्मेदार हैं। जब न्यायाधीश ने पूछा कि क्या वह बच्चों को भी निशाना बनाता तो उसने कहा, "इराक, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में भी बच्चे और महिलाएं मारे जा रहे हैं।"

पाकिस्तानी मूल के इस आतंकवादी ने माना कि उसने पाकिस्तान में आतंकवाद का प्रशिक्षण लिया था। उसने कहा कि उसे पाकिस्तानी तालिबान से महीनों तक प्रशिक्षण लिया और उसने अमेरिका में हमले का पूरा पाठ वहीं सीखा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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