भारत-पाक विदेश सचिवों की मुलाक़ात

हफ़ीज़ चाचड़, बीबीसी हिंदी संवाददाता, इस्लामाबाद
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अगले सप्ताह भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिवों की मुलाक़ात इस्लामाबाद में होगी जिसमें जुलाई में होने वाली बातचीत के लिए एजेंडा तय किया जाएगा. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल बासित ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा,'' भारत की विदेश सचिव निरुपमा राव 24 जून को इस्लामाबाद पहुँच रही हैं और वे अपने पाकिस्तानी समकक्ष सलमान बशीर के साथ उच्चस्तरीय बैठक करेंगी.''
उन्होंने कहा, ''दोनों विदेश सचिवों की बैठक में कश्मीर सहित सभी मुद्दों पर चर्चा की जाएगी और भविष्य की मुलाक़ातों के लिए एजेंडा तय किया जाएगा.'' अब्दुल बासित ने बताया, ''पाकिस्तान एक सकारात्मक सोच के साथ इस बातचीत में भाग ले रहा है और हमें उम्मीद है कि दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की मुलाक़ात में विश्वास बहाल होगा.'' उन्होंने बताया कि पाकिस्तान विश्वास बहाली के लिए उच्चित क़दम उठा रहा है और भविष्य में होने वाली बातचीत में बेहतर प्रगति की उम्मीद है.
इससे पहले विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई जिसमें भारत में साथ होने वाली बातचीत के लिए प्रस्ताव तैयार किए गए और ये प्रस्ताव पाकिस्तानी नेतृत्व को दिए जाएंगे. इस बैठक में ख़ुफिया एजेंसी आईएसआई के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया.
संयुक्त प्रणाली
ख़बरें हैं कि दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की मुलाकात में आतंकवाद और चरमपंथ के ख़ात्मे के लिए संयुक्त प्रणाली को ओर मज़बूत बनाया जाएगा ताकि मुंबई जैसे हमलों से बचा जा सके. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, ''उत्तर वज़ीरिस्तान में हक़्क़ानी गुट के ख़िलाफ कार्रवाई करने के लिए अमरीका का कोई दबाव नहीं है और पाकिस्तान अपनी नीति के अनुसार चरमपंथियों के ख़िलाफ कार्रवाई करेगा.''
उन्होंने कहा, ''अफग़ानिस्तान में बिगड़ती हुई स्थिति में पाकिस्तान सरकार की कोई भूमिका नहीं है और पाकिस्तान स्वयं आतंकवाद का शिकार है, साथ ही उसने इसके ख़ात्मे के लिए लंबा संघर्ष किया है.'' उनके अनुसार शांत और स्थिर अफ़ग़ानिस्तान पाकिस्तान और विशेषकर इस क्षेत्र के हित में है. समाचार पत्रों में इस प्रकार की ख़बरें हैं कि अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान में हमले करने वाले चरमपंथियों के संबंध में पाकिस्तान को जानकारी दी है और हक़्क़ानी गुट के ख़िलाफ कार्रवाई करने के लिए दबाव डाला है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स की उस रिपोर्ट को भी रद्द कर दिया जिसमें कहा गया था कि ख़ुफिया एजेंसी आईएसआई न केवल तालिबान मदद और प्रशिक्षण दे रही है बल्कि उसके अधिकारी तालिबान की बैठकों में भी भाग लेते हैं. पाकिस्तान और चीन के बीच में परमाणु क्षेत्र में सहयोग पर पूछे गए एक सवाल में उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच कई वर्षों से इस क्षेत्र में सहयोग चल रहा है और इसको लेकर किसी प्रकार की चिंता ग़ैर ज़रूरी है.












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