पूर्व पुलिस महानिरीक्षक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
जिला एवं सत्र न्यायाधीश आर.सी. गोदारा ने अहलावत की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अहलावत ने 10 जून को अदालत में याचिका दाखिल की थी, हालांकि बुधवार को सुनवाई के दौरान वह अदालत में मौजूद नहीं थे।
अहलावत के वकील आई.के. गुजराल ने कहा कि अब वह पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करेंगे। उन्होंने कहा कि अहलावत पर झूठे आरोप लगाए गए हैं और इसे पुष्ट करने के लिए ठोस साक्ष्य नहीं हैं। अगर उनके साथ छेड़छाड़ हुई थी और कोई उनकी बात सुन नहीं रहा था तो उन्होंने अदालत का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया। वह आठ साल तक चुप क्यों रहीं।
महिला वकील हरविंदर कौर द्वारा आठ साल बाद मामला दर्ज किए जाने के बाद पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया है।
कौर ने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा कि अहलावत ने 2002 में यौन उत्पीड़न किया था। उस समय अहलावत यमुनानगर जिले के पुलिस अधीक्षक थे।
कौर ने बुधवार को अदालत के फैसले पर संतोष जाहिर करते हुए कहा, "मैं अदालत के फैसले से संतुष्ट हूं। अब मैं चाहती हूं कि पुलिस अहलावत को तत्काल गिरफ्तार करे। "
उल्लेखनीय है कि हाल ही में अदालत ने हरियाणा के पूर्व पुलिस प्रमुख एस.पी.एस राठौड़ द्वारा 1990 में रुचिका गिरहोत्रा के साथ छेड़छाड़ के मामले में उसकी सजा को बरकरार रखा था। रूचिका ने बाद में आत्महत्या कर ली थी।
राठौड़ को इस मामले में निचली अदालत ने छह माह जेल की सजा सुनाई थी जबकि उच्च न्यायालय ने उसे बढ़ाकर 18 महीने कर दिया। फिलहाल राठौड़ चंडीगढ़ की बुरैल जेल में बंद है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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