'भारत ने एंडरसन को सुरक्षित भेजने का वादा किया था'
नई दिल्ली, 15 जून (आईएएनएस)। एक पूर्व अमेरिकी राजनयिक ने खुलासा किया है कि भारत सरकार ने अपने किए वादे को पूरा करने के लिए भोपाल गैस त्रासदी के आरोपी वारेन एंडरसन को सुरक्षित अमेरिका भेजा था।
इस राजनयिक के मुताबिक एंडरसन ने भारत सरकार के समक्ष भोपाल जाकर गैस त्रासदी में मारे गए लोगों व पीड़ितों के प्रति अपनी चिंता जताने की इच्छा जताई थी। भारत सरकार ने एंडरसन की इच्छा का सम्मान करते हुए उसे सुरक्षित स्वदेश भेजने का वादा किया था।
यह राजनयिक हैं गोर्डन स्ट्रीब। वह उन दिनों नई दिल्ली स्थिति अमेरिकी दूतावास में उपप्रमुख थे। इन दिनों वह एमोरी विश्वविद्याालय के इकोनॉमिक्स के अतिथि प्रोफसर हैं।
स्ट्रीब ने एक ईमेल के जरिए आईएएनएस को बताया कि एंडरसन देखना चाहते थे कि त्रासदी में क्या हुआ। वह पीड़ितों के प्रति अपनी चिंता भी जाहिर करना चाहते थे।
उन्होंने कहा, "उस वक्त मुद्दा यह था कि उन्हें सुरक्षित स्वदेश लौटने दिया जाएगा कि नहीं। एंडरसन के लिए यह सावधानी जरूरी थी क्योंकि विश्व भर के कानून अलग-अलग हैं।"
तत्कालीन राजदूत हैरी. जी. बार्नस के भारत से बाहर होने की वजह से स्ट्रीब को इस संबंध में भारतीय विदेश मंत्रालय से संपर्क स्थापित करने का जिम्मा सौंपा गया था।
स्ट्रीब के मुताबिक विदेश मंत्रालय ने उस वक्त उन्हें कहा था, "एंडरसन यदि भारत आना चाहता है तो उसका यह कदम सराहनीय है। भारत सरकार यह सुनिश्चित करना चाहेगी कि इस दौरान उसके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।"
एंडरसन भारत आया और वह मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह से मिलना भी चाहता था लेकिन इस बीच प्रदेश पुलिस ने उसे सात दिसम्बर को गिरफ्तार कर लिया।
स्ट्रीब ने बताया, "इसके बाद मैंने विदेश मंत्रालय से संपर्क साधा। मुझे सुनिश्चित किया गया कि किए गए वादे को पूरा किया जाएगा और एंडरसन को सुरक्षित अमेरिका भेज दिया जाएगा।"
इसी वादे के आधार पर एंडरसन को दिल्ली लाया गया और अगले विमान से उसे अमेरिका रवाना कर दिया गया।
स्ट्रीब ने बताया कि तत्कालीन विदेश सचिव एम. के. रसगोत्रा उस दौरान प्रमुख वार्ताकार थे।
स्ट्रीब का कहना है, "भारत सरकार के निर्णय लेने की प्रक्रिया के बारे में प्रतिक्रिया करने की स्थिति में मैं नहीं हूं। मसलन किसने एंडरसन को छोड़ने संबंधी फैसला लिया और कैसे उन्हें छोड़ा गया।"
स्ट्रीब भारत-चीन अमेरिका इंस्टीट्यूट्स एडवायजरी बोर्ड के सदस्य भी हैं।
उल्लेखनीय है कि अर्जुन सिंह ने इस मुद्दे पर अभी तक अपना मुंह नहीं खोला है जबकि केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने पिछले दिनों कहा था कि लोगों के गुस्से और इससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने के भय से एंडरसन को भोपाल से बाहर भेजा जाना आवश्यक हो गया था।
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के करीबी रहे अरुण नेहरू ने हाल ही में यह दावा किया था कि एंडरसन ने तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री पी. वी. नरसिम्हाराव और राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह से नई दिल्ली में मुलाकात की थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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