विज्ञापन विवाद: नीतीश और भाजपा दोनों पर दबाव
पटना। विज्ञापन विवाद के संदर्भ में जनता दल (युनाइटेड) के अल्पसंख्यक समुदाय के नेता बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से गठबंधन तोड़ने का दबाव बना रहे हैं तो वहीं भाजपा में भी एक धड़ा अंदरखाने नीतीश का साथ छोड़ने की वकालत कर रहा है। दूसरी ओर दोनों दलों का शीर्ष नेतृत्व सुलह की कोशिशों में जुटा है।
बिहार के अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं ने नीतीश पर भाजपा का साथ छोड़ने और राज्य विधानसभा का आगामी चुनाव अकेले लड़ने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इन नेताओं की दलील है कि जिस प्रकार राष्ट्रीय जनता दल (राजद)के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा रोक कर रातोंरात मुसलमानों के सबसे बड़े रहनुमा की छवि बना ली थी, इसी तरह आज नीतीश के पास यही मौका है कि वह गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा को बिहार में ही रोक कर मुसलमानों के सबसे बड़े मसीहा बनें।
चुनाव में अकेले उतरने की सलाह
जद (यु) के लोकसभा सदस्य मोनाजिर हसन, राज्यसभा सदस्य अली अनवर सहित पार्टी के अन्य अल्पसंख्यक नेताओं ने शनिवार रात नीतीश से भेंट कर भाजपा से नाता तोड़कर चुनावी मैदान में अकेले दम उतरने की सलाह दी है। ध्यान देने की बात यह है कि जद (यु) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने भी नीतीश को यही सलाह दी है।
उल्लेखनीय है कि मोदी से जुड़े विज्ञापनों पर जद (यु) में खासा रोष है। खुद नीतीश ने सार्वजनिक तौर पर मोदी की कड़ी आलोचना की थी। मौजूदा विवाद पर पार्टी के सांसद अली अनवर ने आईएएनएस से बातचीत में शायराना अंदाज में यह टिप्पणी की, "इनकी महफिल भी गई, इनके चाहने वाले वाले भी गए। अभी यहां आकर बैठे भी नहीं थे, कि निकाले गए।"
उन्होंने कहा, "नीतीश ने कल मोदी को धोबियापाठ पढ़ा दिया है। मेरा मानना है कि जद (यु)को भाजपा के साथ गठबंधन तोड़ने का वक्त आ गया है। ऐसा होता है तो अगले चुनाव में नीतीश कुमार भारी बहुमत से सत्ता में वापसी करेंगे।"
अच्छी नहीं लग रही मुसलमानों से दोस्ती
मोनाजिर हसन ने कहा, "भाजपा को नीतीश की मुसलमानों से दोस्ती अच्छी नहीं लग रही है। उन्होंने सुनियोजित साजिश के तहत पूरे राज्य में मोदी के इश्तहार छपवाए। मोदी की छवि साम्प्रदायिक है जबकि नीतीश धर्मनिरपेक्ष हैं। यह नीतीश को सत्ता से बेदखल करने की साजिश भी है। भाजपा से अलग होने का यही अच्छा अवसर है।"
उन्होंने कहा कि प्रदेश के बहुसंख्यक नेताओं का मानना है कि जद (यु)को भाजपा के साथ गठबंधन से अलग हो जाना चाहिए और अपने बूते चुनाव में उतरना चाहिए। जद (यु)यदि अकेले चुनाव में उतरती है तो उसे 243 में से 150 सीटों पर सफलता मिलेगी।
ललन सिंह ने भी नीतीश से भेंट कर भाजपा से गठबंधन तोड़ने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि विज्ञापन में मोदी और नीतीश को साथ-साथ दिखाकर उनकी धर्मनिरपेक्ष छवि को तार-तार करने की कोशिश की गई है। उन्हें भाजपा से तत्काल संबंध तोड़ लेना चाहिए। गौरतलब है कि मुसलमानों के रहनुमा बनने के बाद लालू ने एमवाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण के सहारे बिहार की सत्ता पर 15 वर्षो तक शासन किया था।
उधर, भाजपा में भी एक धड़ा है जो नीतीश का साथ छोड़ने के लिए दबाव बना रहा है। यद्यपि ऐसी कोई बात खुलकर सामने नहीं आई है। सूत्रों का कहना कि भाजपा इस पूरे विवाद को तूल नहीं देना चाहती क्योंकि वह अपना पूरा ध्यान कार्यसमिति की बैठक पर लगाना चाहती है। कहा जा रहा है कि पार्टी जल्द इस विवाद को सुलझाने की कोशिश करेगी।
भाजपा का तर्क
पटना में रविवार को इस पूरे विवाद पर भाजपा सिर्फ इतना कहा कि वह एक परिपक्व पार्टी है लेकिन जब स्वाभिमान की बात आएगी तो वह इससे समझौता नहीं करेगी। इससे पहले बिहार भाजपा के एक वरिष्ठ नेता और राज्य सरकार में मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भाजपा की मजबूरी नहीं हैं।
भाजपा प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी से रविवार को संवाददाताओं से सवाल के जवाब में कहा, "भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति में राष्ट्रीय मुददों पर चर्चा होती है। हम एक परिपक्व पार्टी हैं। हम अपनी सहनशीलता दिखा रहे हैं लेकिन जब स्वाभिमान की बात आएगी तो पार्टी इससे समझौता नहीं करेगी।"
इन बयानबाजियों के बीच जद (यु) अध्यक्ष शरद यादव ने मामले को सुलझाने की कोशिश आरंभ कर दी हैं। दिल्ली में पत्रकारों से चर्चा में यादव ने कहा, "हमारा गठबंधन बहुत पुराना है। जो विवाद था वह कल की बात है। आज वह परिस्थिति नहीं है। हम चाहते हैं कि हमारे बीच अच्छा रिश्ता रहे। आगे कटुता नहीं बढ़नी चाहिए। कौन क्या कह रहा है उस पर टिप्पणी करने से विवाद तूल पकड़ेगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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