ईरान पर प्रतिबंध के लिए बाध्य होगा भारत : विशेषज्ञ
एक आधिकारिक सूत्र ने शुक्रवार को आईएएनएस को बताया कि संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) का एक जिम्मेदार सदस्य होने के नाते भारत को संयुक्त राष्ट्र की ओर से ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को लागू करना ही होगा।
उन्होंने कहा कि हालांकि इसका अर्थ यह नहीं कि ईरान के मामले में भारत पश्चिमी देशों का साथ दे रहा है, बल्कि भारत ने हमेशा ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे को कूटनीति और बातचीत के जरिए सुलझाने की बात कही है।
रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ के. सुब्रमण्यम ने कहा, "हम संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव को मानने के लिए बाध्य हैं।"
उन्होंने कहा, "ईरान की चिंता है कि वह दोनों ओर से सुन्नी देशों पाकिस्तान और साऊदी अरब के परमाणु हथियारों के निशाने पर है। यह एक वास्तविक सुरक्षा चिंता है इसका समाधान होना जरूरी है।"
यदि अमेरिका और यूरोपीय संघ इस माह के अंत तक एकपक्षीय प्रतिबंध लागू करते हैं तो भारत भी ऐसा करने के लिए बाध्य हो जाएगा। ईरान के ऊर्जा क्षेत्र को नुकसान होने से नई दिल्ली के ऊर्जा सुरक्षा संबंधी हितों को नुकसान पहुंचेगा।
सुब्रमण्यम ने कहा, "यदि प्रतिबंध का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र में पारित नहीं होता तो हम बाध्य नहीं होंगे। अमेरिकी प्रतिबंधों की स्थिति में निर्णय लेने का फैसला भारत का होगा।"
वर्ष 2006 में ईरान के परमाणु रक्षा कार्यक्रम के खिलाफ पहले चरण के प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से ही पिछले कुछ वर्षो से भारत ने ईरान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के उपायों को समर्थन दिया है।
पिछले साल नवंबर में भारत ने ईरान के खिलाफ एक अंतर्राष्ट्रीय प्रस्ताव के समर्थन में वोट दिया था । भारत ने हालांकि कहा था कि प्रतिबंधों की समीक्षा की जाए और वार्ता के लिए सभी विकल्प खुले रखे जाएं।
अमेरिका को उम्मीद है कि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के नए प्रतिबंधों का कार्यान्वयन करेगा।
अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री विलियम बर्न्स ने वाशिंगटन में पत्रकारों से कहा, "मुझे लगता है कि सुरक्षा परिषद के पूर्व के सभी प्रस्तावों पर भारत का रुख हमेशा सराहनीय रहा है और इस मामले में भी भारत सरकार इस प्रस्ताव का कार्यान्वयन करेगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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