बांग्लादेश, म्यांमार में उल्फा नेता समर्पण करेंगे: पिल्लै
आईएएनएस को दिए एक साक्षात्कार में पिल्लै ने कहा, "बांग्लादेश और म्यांमार में मौजूद कुछ प्रमुख नेताओं और कमांडरों ने स्वयं सामने आने की इच्छा जताई है।"
पिल्लै सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए मेघालय के तीन दिन के दौरे पर थे।
मेघालय से दिल्ली लौटते समय पिल्लै ने गुवाहाटी में कहा, "असम सरकार पहले ही उल्फा के साथ शांति प्रक्रिया की शुरुआत कर चुकी है और हमें समझौता होने की उम्मीद है।"
उन्होंने कहा कि उल्फा का कमांडर परेश बरुआ इस शांति वार्ता के लिए काफी महत्वपूर्ण था लेकिन शांति प्रक्रिया से दूर रहने से यह विद्रोही नेता अब अकेला पड़ जाएगा।
गृह सचिव ने कहा, "परेश बरुआ अगर असम की जनता शांति की इच्छा को स्वीकार नहीं करेगा तो वह हाशिए पर चला जाएगा।"
असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई पिछले सप्ताह केंद्र सरकार से उल्फा नेताओं से शांति वार्ता शुरू करने की बात कह चुके हैं। उल्फा के ज्यादातर नेता इन दिनों जेल में हैं।
उल्फा के छह प्रमुख नेता अध्यक्ष अरविंद राजखोवा, 'डिप्टी कमांडर इन चीफ' राजू बरुआ, 'विदेश सचिव' साशा चौधरी, 'वित्त सचिव' चित्रभान हजारिका, 'सांस्कृतिक सचिव' प्रणति डेका और 'राजनीतिक विचारक' भीमकांत बर्गायन जेल में हैं।
उल्फा का उपाध्यक्ष प्रदीप गोगोई और प्रचार प्रमुख मिथिंगा दायमेरी फिलहाल जमानत पर हैं और शांति वार्ता के लिए जनमत तैयार कर रहे हैं। सिर्फ परेश बरूआ ही इस समय गिरफ्त से बाहर है।
पिल्लै ने कहा, "परेश बरुआ म्यांमार और चीन के युन्नान प्रांत की सीमाओं के बीच कहीं छिपा हो सकता है।"
उल्फा महासचिव अनूप चेतिया 1997 में हुई गिरफ्तारी के बाद से ही रक्षात्मक हिरासत में है।
गृह सचिव ने कहा कि ये समूह जब कमजोर होने लगते हैं तो वे हताश होकर हिंसककार्रवाइयों का सहारा लेते हैं इसलिए इस इलाके में अलर्ट रखा जा रहा है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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