हिमाचल के पहाड़ों को फिर से हराभरा बनाया (विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष)
शिमला, 5 जून (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में सतलुज नदी के आसपास के भूखंड की बंजर जमीन को घने जंगलों में बदल दिया गया है। यह काम एक अभियान के तहत पूर्व कर्मियों के सहयोग से किया गया है। उन्होंने पहाड़ों को फिर से हराभरा बनाने का बीड़ा उठाया था।
मेजर अजय सांगवान, जो शिमला से 25 किलोमीटर दूर कुफ्री स्थित 133 पारिस्थितिकी कार्य बल (इको टास्क फोर्स) की जिम्मेवारी संभाल रहे हैं, ने शनिवार को आईएएनएस को बताया, "100 पूर्व कर्मियों ने तीन वर्षो के दौरान सतलुज नदी के आसपास की 280 हेक्टेयर भूमि को हरभरा बनाया है।"
पारिस्थितिकीय जवानों के इन कार्यो की देखरेख कार्य बल कर रहा है।
सांगवान ने कहा कि शिमला से 250 किलोमीटर दूर 800 मेगावाट कोल जलविद्युत परियोजना के जलग्रहण क्षेत्र में हरितपट्टी बनाई गई है।
उन्होंने कहा, "लगाए गए पौधों में से 85 प्रतिशत पूर्णत: बचे हुए हैं। इस सफलता के बाद हमारा लक्ष्य 2,500 हेक्टेयर भूमि को हराभरा बनाने का है। यह कार्य कुल्लू, चंबा और मंडी जिलों में लारजी, पार्बती और अल्लियन-दुहांगा विद्युत परियोजना के जलग्रहण क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली भूमि पर किया जाएगा।"
उनके अनुसार इस कार्य के लिए कार्य बल को क्षतिपूरक वनरोपण कोष प्रबंध एवं योजना प्राधिकरण (सीएएमपीए) की ओर से धन उपलब्ध कराया जाएगा।
कोल के जिला अधीक्षक चौहान को दी रिपोर्ट में सांगवान ने कहा, "लारजी, पार्बती और अल्लियन-दुहांगा विद्युत परियोजना के जलग्रहण क्षेत्र में पौधारोपण के लिए अलग से पारिस्थितिकीय जवानों का दल गठित किया जाएगा। हमारा लक्ष्य प्रतिवर्ष 250 हेक्टेयर भूमि में वनरोपण का है।"
चौहान एवं सांगवान उन भारतीय सैन्य अधिकारियोंे में शामिल हैं, जिनका पदस्थापन क्षेत्रीय नागरिक सेना में किया गया है। उन्होंने कार्य बल में पूर्व कर्मियों को फिर से सेवा के अवसर दिए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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