उमर का विधानसभा के विशेष सत्र से इंकार
श्रीनगर, 5 जून (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (एएफएसपीए) निरस्त करने की मांग करने और नादिहाल गांव में गत 30 अप्रैल को कथित फर्जी मुठभेड़ में तीन युवकों की मौत पर चर्चा करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावना से इंकार किया है।
उमर ने बात शुक्रवार को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता महबूबा मुफ्ती के खत के जवाब में भेजे खत में कही। महबूबा ने उमर को भेजे पत्र में मांग की थी कि एएफएसपीए को निरस्त करने की मांग करने संबंधी प्रस्ताव पारित करने के लिए विशेष सत्र बुलाया जाए।
उमर ने अपने खत में कहा, "नादिहाल की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन अतीत के विपरीत इस बार राज्य सरकार ने इस मामले की जम्मू एवं कश्मीर पुलिस के माध्यम से जांच कराने की पहल की तथा दुनिया को दिखाया कि हम सिर्फ संकल्प ही नहीं लेते बल्कि कार्रवाई भी करते हैं।"
नादिहाल गांव के तीन निवासी-शहजाद अहमद खान, रियाज अहमद खान और मुहम्मद शफी लोन कथित तौर पर फर्जी मुठभेड़ में मारे गए थे।
इस सिलसिले में पुलिस ने चार व्यक्तियों- प्रांतीय सेना के जवान और तीन सेना के जासूसों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में सेना के एक अधिकारी को भी आरोपी बनाया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा, "मुझे यकीन है कि नादिहाल घटना के दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी।"
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि एएफएसपीए लागू करने के इतिहास के बारे में दोषारोपण करना उचित या जरूरी है। सिर्फ यही कहा जा सकता है कि इस कानून के बारे में उस समय कुछ नहीं किया गया जब आपके पास साढ़े पांच साल का वक्त था।"
उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनके कार्यकाल में राज्य में स्थायी शांति बहाल हो सकेगी और 2014 में उनके कार्यकाल समाप्त होने से पहले एएफएसपीए जैसे कानून लागू करने की जरूरत समाप्त हो जाएगी।
विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की महबूबा की मांग के बारे में उमर ने कहा कि उन्हें इसकी कोई जरूरत नहीं लगती।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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