अफजल गुरु की फाइल गृह मंत्रालय को भेजी (लीड-1)
नई दिल्ली, 4 जून (आईएएनएस)। दिल्ली के उपराज्यपाल तेजेंदर खन्ना ने संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु की दया याचिका की फाइल शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दी। इस मामले पर टिप्पणी के लिए यह फाइल लगभग चार साल से दिल्ली सरकार के पास थी।
राजभवन के सूत्रोंे ने आईएएनएस को बताया कि दिल्ली सरकार ने 19 मई को अपने स्पष्टीकरण सहित अफजल गुरु की याचिका की फाइल उपराज्यपाल खन्ना को लौटा दी थी। खन्ना ने 'सावधानी पूर्वक अध्ययन' कर व 'व्यक्तिगत टिप्पणी' लिखकर इसे गृह मंत्रालय को भेज दिया है।
सूत्रों ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने अफजल गुरु को 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हुए हमले के लिए दोषी करार देते हुए उसे मृत्युदंड की जो सजा सुनाई थी, राजभवन ने उसका विरोध न करते हुए फाइल गृह मंत्रालय को सौंप दी है।
दिल्ली सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का समर्थन तो किया है, लेकिन यह अंदेशा भी जताया है कि अफजल को फांसी दिए जाने के वक्त कानून-व्यवस्था 'बिगड़' सकती है।
उपराज्यपाल कार्यालय के एक अधिकारी ने 27 मई को कहा था कि फाइल का गंभीरता पूर्वक अध्ययन किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली सरकार के पास अफजल की फाइल चार वर्षो तक पड़ी रही और इस दौरान गृह मंत्रालय की ओर से उसे 16 बार स्मरण-पत्र भेजा गया था। अंतिम बार मई में भेजे गए स्मरण-पत्र के जवाब में दिल्ली सरकार ने कहा था कि इस मामले पर कार्य चल रहा है।
मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने पत्रकारों से कहा था, "इस मामले पर राज्य सरकार क्या टिप्पणी दे सकती है, अंतिम निर्णय तो राष्ट्रपति को लेना है। "
ज्ञात हो कि कश्मीर की सोपोर घाटी के निवासी गुरु को 13 दिसंबर 2001 के संसद हमले में दोषी करार दिया गया था। उसे 2002 में फांसी की सजा सुनाई गई थी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2003 में इस सजा को स्वीकृति दी थी।
सर्वोच्च न्यायालय में भी इस सजा को बरकरार रखे जाने के बाद गुरु की पत्नी तबस्सुम ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर की थी।
राष्ट्रपति ने इस याचिका पर 2005 में गृह मंत्रालय से राय मांगी थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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