पवार ने कहा आईपीएल से संबंध नहीं, भाजपा ने इस्तीफा मांगा (राउंडअप)

शुक्रवार को इसी मुद्दे पर पवार ने अपने और अपने परिजनों को पाक-साफ करार दिया वहीं उनकी सांसद बेटी सुप्रिया सुले ने भी यही बात कही, लेकिन इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पवार से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की है। भाजपा का आरोप है कि व्यक्तिगत हितों के लिए पवार ने देश को अंधेरे में रखा है।

पवार को हालांकि उस समय राहत मिली जब आईपीएल के निलंबित कमिश्नर ललित मोदी ने संवाद के लिए उपयोग में लाए जाने वाले अपने सबसे पसंदीदा माध्यम-सोशल नेटवर्किं ग साइट ट्विटर के जरिए यह साफ करना चाहा कि पुणे फ्रेंचाइजी टीम में पवार या उनके परिवार के किसी सदस्य की हिस्सेदारी नहीं है।

पवार ने शुक्रवार को पत्रकार सम्मेलन में कहा कि उनके परिवार के किसी भी सदस्य का आईपीएल से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं है। पवार के मुताबिक उनके परिवार के किसी सदस्य ने नीलामी प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया है। उल्लेखनीय है कि समाचार पत्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस 'सिटी कार्पोरेशन' नामक कंपनी ने बोली लगाई थी उसके निदेशक मंडल में पवार, उनकी पत्नी और बेटी शामिल हैं।

पवार ने कहा, "जहां तक इस रिपोर्ट की बात है तो ऐसी बात दो महीने पहले भी मीडिया में आई थी। मैं कहना चहता हूं कि मेरा या मेरे परिवार का आईपीएल से प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से कोई संबंध नहीं है।" पवार ने माना कि पुणे फ्रेंचाइजी के लिए सिटी कार्पोरेशन की ओर से बोली लगाई थी लेकिन उन्होंने बोली की प्रक्रिया में स्वयं या परिवार के शामिल रहने की बात को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि बोली व्यक्तिगत स्तर से लगाई गई थी और इसमें कंपनी का कोई निदेशक शामिल नहीं था।

पवार ने कहा, "पुणे टीम के लिए लगाई गई बोली में सिटी कार्पोरेशन के प्रबंध निदेशक अनिरुद्ध देशपांडे शामिल थे। देशपांडे ने व्यक्तिगत स्तर पर इस नीलामी प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। कंपनी ने इस संबंध में अपना पक्ष साफ कर दिया था। उसने अपनी विज्ञप्ति के माध्यम से साफ कर दिया था कि देशपांडे व्यक्तिगत स्तर पर बोली में शामिल थे। इससे कंपनी का कोई संबंध नहीं था।"

सरकार द्वारा आईपीएल में बरती गई अनियमितता की जांच किए जाने और दोषियों को सजा दिए जाने के सवाल पर पवार ने कहा कि इसका क्रिकेट और क्रिकेटरों से कोई संबंध नहीं। बकौल पवार, "जांच होने दीजिए, हम इस पर नजर रखे हुए हैं। वैसे इसका क्रिकेट और क्रिकेटरों से कोई सीधा संबंध नहीं।"

उधर, मुंबई में पवार की सांसद पुत्री सुले ने भी कहा है कि देशपांडे ने व्यक्तिगत स्तर पर पुणे फ्रेंचाइजी के लिए बोली लगाई थी और उनके इस कदम का कंपनी के निदेशक मंडल ने विरोध किया था। सुले ने कहा, "सिटी कार्पोरेशन में हमारी सिर्फ 16 फीसदी हिस्सेदारी है और ऐसे में कंपनी के फैसले में हमारा दखल नहीं होता है। बोली में मेरे परिवार की कोई भूमिका नहीं थी। मैंने पहले भी कहा है कि आईपीएल से हमारा कोई संबंध नहीं है।"

पवार को विवाद में उलझता देख भाजपा ने अपना दांव खेला और यह आरोप लगाते हुए पवार से इस्तीफा मांगा है कि वह आईपीएल से जुड़े इस मामले में अपने हितों को लेकर देश को गुमराह कर रहे हैं। इस मुद्दे पर पार्टी का मत रखते हुए भाजपा के प्रवक्ता रवि शंकर प्रसाद ने पत्रकारों से कहा, "पवार को तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए। अगर वह ऐसा नहीं करते तो हम प्रधानमंत्री से उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग करते हैं।"

पवार की इस दलील पर कि पुणे फ्रेंचाइजी के लिए सिटी कार्पोरेशन की ओर से बोली लगाई थी लेकिन बोली देशपांडे ने व्यक्तिगत स्तर से लगाई गई थी, प्रसाद ने कहा कि पवार का यह दावा 'महज झूठा बहाना' है। प्रसाद के मुताबिक पवार ने इस मुद्दे पर अपने हितों के लिए देश को गुमराह किया है, ऐसे में उन्हें अपने पद पर बने रहना का कोई अधिकार नहीं। प्रसाद ने साथ ही इस मामले को लेकर जांच की मांग की।

उन्होंने कहा कि देशपांडे का मुंबई की एक निर्माण कंपनी, महाराष्ट्र क्रिकेट संघ और अन्य कंपनियों के नाम पर बोली में शामिल होना कंपनी कानून का उल्लंघन है और इसकी विस्तार से जांच होनी चाहिए। प्रसाद ने आईपीएल की फ्रेंचाइजी टीमों से जुड़े पूरे मामले में द्विपक्षीय संसदीय जांच की भी मांग की।

उधर, इन दिनों रोम की सैर कर रहे मोदी ने ट्विटर पर जारी अपनी टिप्पणी में कहा कि पुणे फ्रेंचाइजी टीम के लिए देशपांडे द्वारा लगाई गई बोली में पवार के परिवार का कोई सदस्य शामिल नहीं रहा है। मोदी ने साफ शब्दों में लिखा है कि पवार और उनके परिवार का उस नीलामी से कोई संबंध नहीं। साथ ही यह भी सत्य है कि इस परिवार की किसी फ्रेंचाइजी में किसी प्रकार की हिस्सेदारी नहीं है।

मोदी की टिप्पणी, "पवार का परिवार इस मामले से बिल्कुल भी नहीं जुड़ा हुआ है। साथ ही मैं साफ करना चाहता हूं कि केंद्रीय कृषि मंत्री के परिवार की किसी फ्रेंचाइजी में कोई हिस्सेदारी नहीं है। पुणे फ्रेचाइजी के लिए बोली देशपांडे ने लगाई थी और वह भी पूरी तरह व्यक्गित हैसियत से। उन्होंने कहा था कि अगर वह टीम का मालिकाना हक पाने में सफल रहे तो वह उसे चलाने के लिए एक नई कंपनी गठित करेंगे।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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