भारत, अमेरिका का आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष का संकल्प
वाशिंगटन, 4 जून (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा 'वैश्विक जिम्मेदार ताकत' भारत के साथ संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिए जाने के साथ ही दोनों देशों ने 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया है।
आतंकवाद निरोधी कार्रवाइयों से लेकर व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग का संकल्प लेते हुए दोनों देशों ने रणनीतिक सहभागियों के रूप में क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर एक-दूसरे से परामर्श करते रहने और आपसी हितों के प्रति संवेदनशील बने रहने पर सहमति जाहिर की है।
प्रथम भारत-अमेरिकी रणनीतिक वार्ता के बाद जारी साझा बयान में कहा गया है, "उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि वैश्विक संस्थानों में समकालीन वास्तविकता की झलक होनी चाहिए और नयी सदी की चुनौतियों से निपटने के लिए उन्हें प्रभावशाली बनाया जाना चाहिए।"
यह रणनीतिक वार्ता नवंबर के आरंभ में होने वाली अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ चौथी द्विपक्षीय वार्ता का आधार तैयार करने में मददगार साबित हुई है। वक्तव्य में सहयोग व्यापक बनाने के लिए विचार-विमर्श में तेजी लाने का संकल्प व्यक्त किया गया है।
विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा और अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन का कहना है कि द्विपक्षीय वार्ता और द्विपक्षीय तंत्र, दोनों देशों के बीच भविष्य में सहयोग बढ़ाने के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण की पेशकश करते हुए भारत-अमेरिकी भागीदारी बढ़ाने का पुष्ट आधार मुहैया कराएगी।
वैश्विक सुरक्षा और स्थायित्व के लिए दोनों देशों का मानना है कि उनके पास व्यापार और निवेश, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, ढांचागत निवेश, जलवायु परिवर्तन में कमी लाने, ऊर्जा सुरक्षा, शिक्षा, कृषि, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य संबंधी देखभाल और जन शक्तिकरण क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की भरपूर संभावनाएं हैं।
साझा वक्तव्य में कहा गया है कि ओबामा ने भारतीय शिष्टमंडल का स्वागत किया और बढ़ती भारत-अमेरिका रणनीतिक भागीदारी को गति प्रदान करने के लिए प्रतिबद्धता जाहिर की।
कृष्णा और क्लिंटन ने जनता, व्यापार और सरकारी स्तर पर सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जाहिर की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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