भारत-दक्षिण अफ्रीका सीईओ फोरम गठित
इस अवसर पर देश के प्रमुख कारोबारियों को संबोधित करते हुए शर्मा ने कहा कि व्यापारिक क्षेत्र के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की यह फोरम नीति निर्धारण हेतु विचार और व्यवसाइयों के लिए आपसी विचार-विमर्श के लिए एक उपयुक्त मंच साबित होगी।
शर्मा ने कहा, "भारत, दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में दक्षिण अफ्रीका का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, दक्षिण अफ्रीका के सबसे बड़े 10 व्यापारिक सहयोगियों में से एक है। हमारा आपसी व्यापार वर्ष 2000-2001 के 1.3 अरब डॉलर से बढ़कर पिछले साल सात अरब डॉलर के पार पहुंच गया है और 2012 तक यह 10 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।"
वर्ष 2009-10 में भारत में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 34.16 अरब डॉलर का रहा है। सेवाओं, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर, हाउसिंग और रियल एस्टेट, बिजली, ऑटोमोबाइल और केमिकल उद्योगों में सबसे ज्यादा विदेशी प्रत्यक्ष निवेश आया है।
शर्मा ने द्विपक्षीय सहयोग के लिए कुछ क्षेत्रों को चिन्हित करते हुए कहा कि आधारभूत संरचना, निर्माण, ऊर्जा, खनन, तेल एवं गैस, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी, दवा और ऑटो मोबाइल क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा दिया जा सकता है।
उन्होंने कहा, "भारत और एसएसीयू (दक्षिणी अफ्रीका सीमा संगठन) के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता इन क्षेत्रों के साथ मुक्त व्यापार समझौते का आधार बन सकता है। द्विपक्षीय निवेश संवर्धन और संरक्षण के लिए भी एक समझौता प्रस्तावित है जो कि दोनों के बीच व्यापार और निवेश में बढ़ोतरी के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।"
नव गठित सीईओ फोरम की भारतीय पक्ष की अध्यक्षता रतन टाटा और दक्षिण अफ्रीका के पक्ष की अध्यक्षता अफ्रीका रेनबो मिनरल्स के अध्यक्ष पेट्रिक मोत्सपे करेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications