जलवायु परिवर्तन से निपटना है, तो शाकाहारी बनिए!
लंदन, 3 जून (आईएएनएस)। मांस खाने से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। ऐसे में दुनिया भर के लोग शाकाहारी भोजन को प्राथमिकता देकर जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने में योगदान कर सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र की एक समिति के विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन की सबसे बड़ी वजह खाद्य उत्पादन और ईंधन का इस्तेमाल है।
अंतर्राष्ट्रीय सतत संसाधन प्रबंधन की अंतर्राष्ट्रीय समिति का कहना है कि इसके असर में पर्याप्त कमी तभी संभव है जब दुनिया भर के खानपान में बदलाव लाया जाए। ऐसी आशंका है कि जनसंख्या बढ़ने से खाद्यान्न उत्पादन जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संबंधी समस्याओं की अहम वजह बनेगा। भोजन बनाने के लिए तेल और कोयला का इस्तेमाल घटता जा रहा है और इसके लिए पवन और सौर ऊर्जा के स्रोत इस्तेमाल में लाए जा रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक खाद्य उत्पादों के लिए 70 फीसदी पानी, 38 फीसदी जमीन का इस्तेमाल होता है। इसके परिणामस्वरूप 19 फीसदी ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जित होती है।
'द टेलीग्राफ' के अनुसार यह रिपोर्ट दुनिया भर के देशों की सरकारों के सामने प्रस्तुत की गई। इसमें कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन का खतरा कम करते हुए दुनिया का पेट भरने के लिए जरूरी है कि शाकाहार को ज्यादा से ज्यादा अपनाया जाए।
संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण कार्यक्रम के निदेशक एचिम स्टेनर का कहना है कि भोजन में मांस की मात्रा घटाकर जलवायु परिवर्तन से निपटा जा सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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