मास्को में शुरू हुआ मंगल ग्रह अभियान
समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के मुताबिक 'मार्स-500 मॉड्यूल' नाम के इस प्रयोग में छह लोग शामिल होंगे। इस दौरान इन लोगों को उन अनुभवों से दो चार होना पड़ेगा, जो असल यात्रा के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों के रास्ते में आते हैं।
मास्को इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड बॉयोलॉजिकल प्रॉबलम्स के प्रवक्ता पावेल मार्गुनोव ने बताया कि इस यात्रा के दौरान इन अंतरिक्ष यात्रियों को मंगल तक पहुंचने में 250 दिन लगेंगे। 30 दिनों तक मंगल पर रुकने के बाद इन यात्रियों पर पृथ्वी पर लौटने में 240 दिनों का समय लगेगा।
मंगल ग्रह अभियान अमेरिका की भी प्राथमिकता बन चुका है। राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा चंद्र अभियान को रोके जाने के बाद अमेरिकी अंतरिक्ष केंद्र मुख्य रूप से इसी पर ध्यान केंद्रित किए हुए है।
बहरहाल, नकली अभियान के अंतर्गत अंतरिक्ष यात्रियों को दो वर्ष तक अलग-थलग रहना होगा। उसके बाद उन्हें उस हालात का आभास होगा, जो उन्हें असल यात्रा के दौरान हो सकता है। हालांकि इस नकली यात्रा में विकिरण और भारहीनता की समस्या नहीं रहेगी।
इस अभियान में शामिल लोगों को एक लाख डॉलर इनाम के तौर पर मिलेंगे। इस अभियान का नेतृत्व और देखरेख रूस के एलेक्सी सियेव कर रहे हैं। इस दौरान ये लोग मंगल पर जाने, वहां उतरने और वहां से रवाना होने का अभ्यास करेंगे।
अपनी इस नकली यात्रा के दौरान ये लोग ईमेल के जरिए पृथ्वी पर संपर्क करेंगे। यह ईमेल निर्धारित वक्त से 40 मिनट देरी से प्राप्त होगा। यात्रा के लिए जो अंतरिक्ष यान तैयार किया गया है, वह प्रयोगशाला, निवास क्षेत्र, छोटे बागीचे और गोदाम से सुसज्जित है।
इस अभियान में मूल रूप से कुल 11 लोग शामिल थे। इनमें सात रूस के और एक-एक चीन, फ्रांस, इटली और बेल्जियम के थे। अंतिम रूप से इस अभियान के लिए तीन रूसियों, एक फ्रांसीसी, एक चीनी और इटली के एक व्यक्ति का चयन किया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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