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इजरायल हमला : संयुक्त राष्ट्र ने की 'निष्पक्ष जांच' की मांग

By Staff
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Protester Israel
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक बयान जारी कर फ़लस्तीनियों के लिए राहत ले जा रहे जहाज़ों के बेड़े पर हुए इसराइली हमले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. बयान में कहा गया है कि जांच 'त्वरित, निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय" होनी चाहिए. संयुक्त राष्ट्र ने जहाज़ों पर राहत कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ की गई कार्रवाईयों की भर्त्सना की है. इन कार्रवाईयों के दौरान दस कार्यकर्ताओं की मौत हो गई थी.

इस घटना के बाद व्यापक स्तर पर इसराइल की आलोचना हुई है और गज़ा पर तीन साल से लगाए गए प्रतिबंध को हटाने की मांग भी तेज़ हो गई है. संयुक्त राष्ट्र में इस मुद्दे पर लंबी बहस के बाद यह बयान जारी किया गया. सुरक्षा परिषद ने कहा कि इस घटना में इसराइली सैन्य अभियान के कारण लोगों का मरना अफसोसजनक है. इसराइली सैनिकों ने जहाज़ो के बेड़े पर अंतरराष्ट्रीय समुद्र में हमला किया था.

संयुक्त राष्ट्र में बीबीसी संवाददाता बारबरा प्लेट के अनुसार यह बयान तुर्की और अमरीका के बीच एक समझौते के बाद जारी किया गया है. तुर्की ने इसराइली कार्रवाई की कड़ी निंदा की थी जबकि अमरीका चाहता था कि बयान की भाषा कड़ी न हो. समझौते के तहत इसराइल की सीधी भर्त्सना नहीं की गई और न ही अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की गई.

जहाज़ों पर किए गए हमले में मारे गए अधिकतर लोग तुर्की के थे और जहाज़ों के इस बेड़े को ले जाने का काम तुर्की की स्वयंसेवी संस्थाएं कर रही थीं. हालांकि इस समझौते के बाद गज़ा पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को ख़त्म करने की मांग भी ठंडी पड़ने की संभावना है लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर जनमत इसराइल के ख़िलाफ़ बन गया है.

संयुक्त राष्ट्र में फ़लस्तीनी पर्यवेक्षक रियाद मंसूर का कहना है कि अंतिम बयान की भाषा से वो बहुत निराश हैं. गज़ा पर लगे प्रतिबंध के बारे में उनका कहना था कि अब तक संभवत इस बयान में संयुक्त राष्ट्र ने स्पष्ट रुप से आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने की मांग की है. संयुक्त राष्ट्र के बयान में कहा गया है कि गज़ा में स्थिति को ज़्याद दिनों तक इस तरह रखा नहीं जा सकता.

इस बयान के बाद गज़ा से कई चरमपंथी सीमा पर कर इसराइल में घुस आए और उन्होंने गोलीबारी की. इसराइली कार्रवाई में में दो चरमपंथी मारे गए हैं. रुस और यूरोपीय संघ ने इसराइली अभियान की निष्पक्ष जांच की मांग की थी और गज़ा से प्रतिबंध हटाने की भी मांग की थी. हालांकि संयुक्त राष्ट्र में इसराइल के दूत ने कहा था कि इसराइल के सैनिकों पर जहाज़ पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने हमला किया था जिसके बाद उन्हें बचाव में कार्रवाई करनी पड़ी.

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