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लिव इन रिलेशन के नए ट्रेंड ने बदल डाली बलात्‍कार की परिभाषा

By Ajay
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Relationship
बेंगलुरू (अजय मोहन)। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लिव इन रिलेशन न तो जुर्म है और न ही पाप यानी खुले शब्‍दों में कोर्ट ने रिलेशनशिप के इस नये ट्रेंड को अपनी स्‍वीकृति दे दी। मानवाधिकारों की नजरों से देखें, तो सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा, वो सही है, लेकिन एक समाजशास्‍त्री की नजरों से देखें, तो भारतीय समाज पर इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है। और यही कारण है कि लिव-इन के इस नये ट्रेंड ने रेप की परिभाषा को बदल डाला है।

असल में रेप कितना भयावह होता है। अगर नहीं तो उन लड़कियों से जाकर पूछें जो जबरन इसका शिकार हुई हैं। उन बच्चियों से जाकर पूछें जो आज भी अपनी आप-बीती को सोच-सोच कर सिहर उठती हैं। उन महिलाओं से जाकर पूछें, जिनका परिवार बिखर गया। आज यह सवाल इसलिए प्रासंगिक हो गया है, क्‍योंकि समाज में एक नया ट्रेंड विकसित हो रहा है, जो शायद पुरुषों के लिए आगे चलकर घातक साबित हो सकता है।

नया ट्रेंड ताल्‍लुक रखता है लिव इन रिलेशंस से

ट्रेंड ताल्‍लुक रखता है लिव इन रिलेशंस से। यानी बालिग युगल जो साथ रहते हैं। उनके बीच शारीरिक संबंध स्‍थापित होता है और यदि जरूरत पड़ी तो बाद में अपने रिलेशन को शादी का रूप दे देते हैं। दोनों के बीच तना-तनी हो जाए, और लड़के पर बलात्‍कार का आरोप लगा कर उसे जेल भेज दिया जाए, यह कहां तक सही है इसका फैसला तो न्‍यायपालिका ही कर सकती है, लेकिन यहां पर सुप्रीम कोर्ट का वो फैसला जो पिछले महीने 23 मार्च को सुनाया गया था, कि लिव-इन रिलेशनशिप या शादी से पहले रजामंदी के साथ सेक्‍स अपराध के दायरे में नहीं है, पूरी तरह विपरीत मालूम होता है।

एक तरफ सुप्रीम कोर्ट शादी से पहले सेक्‍स को अपराध के दायरे में नहीं मान रहा है, और दूसरी पुलिए महज एक शिकायत की बिला पर बलात्‍कार का केस बना रही है। हम याद दिलाना चाहेंगे 2010 का एयर होस्‍टेस श्‍वेता का केस, जिसने लिव-इन रिलेशन के बाद अपने ब्‍वॉयफ्रेंड वरुण पर रेप केस ठोक दिया।

जिस समय वरुण और श्‍वेता के बीच शारीरिक संबंध बने तब वो अपराध नहीं था, तो अब इसे बलात्‍कार की संज्ञा देकर अपराध क्‍यों कहा जा रहा है। हां उस पर धोखाधड़ी का केस जरूर बनता है, क्‍योंकि वो श्‍वेता से शादी का वायदा कर मुकर गया। ठीक वैसा ही हरियाणा के पूर्व उपमुख्‍यमंत्री चंद्र मोहन उर्फ चांद मोहम्‍मद और अनुराधा बाली उर्फ फिजा के केस में हुआ था। आज फिजा इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उस केस में भी चंद्र मोहन पर रेप की धाराएं लगायी गई थीं।

कुल मिलाकर देखा जाए तो रेप की इस नई परिभाषा महिलाओं को पुरुषों के खिलाफ हथियार देने जैसा काम कर रही है। कोई भी महिला रजामंदी के साथ संबंध स्‍थापित करने के बाद पार्टनर को ब्‍लैकमेल कर सकती है। क्‍योंकि भारतीय कानून हमेशा से ही महिलाओं के प्रति काफी संवेदनशील है।

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English summary
According to verdict given by Supreme Court, sex before marriage is not crime, then why police registered rape case against live-in partners in case of acquisition.
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