'मुलायम' की 'राजनीति' पर भारी 'जया' का 'अमर प्रेम'

अभी दो दिन पहले तक राजनीतिक गलियारों में केवल ये चर्चा थी कि जया बच्चन ने अपने प्रिय अमर सिंह को छो़ड़ दिया है और एक बार फिर वो सपा के माध्यम से राज्य सभा पहुंचने वाली है। कयास लगाया जाने लगा कि अगर जया बच्चन राज्य सभा पहुंचती हैं तो इसका मतलब साफ है कि उनके और अमर के बीच के रिश्तों की मिठास खत्म हो गई है। रही सही कसर ठाकुर अमर सिंह के ब्लॉग ने पूरी कर दी । जिसमें उन्होंने बड़ी ही खूबसूरती से अपने दर्दे-दिल को बयां किया था।

लेकिन इन सारी बातों पर विराम तब लग गया जब शुक्रवार को जया बच्चन ने राज्य सभा जाने के लिए सपा को मना कर दिया, और इसके पीछे कारण उन्होंने अपने पारिवारिक कारणों को बताया, तब से यही समझा जा रहा है कि जया बच्चन ने ये फैसला अपने पति और अपने घरवालों के दवाब में लिया है। सबको पता है कि अमिताभ बच्चन को अमर सिंह अपना बड़ा भाई कहते हैं, तो क्या पारिवारिक दवाब ने जया बच्न को राज्य सभा जाने से रोका?

समाजवादी पार्टी के सूत्रों के मुताबिक जया बच्चन ने राज्यसभा का टिकट छोड़ने का फ़ैसला किया है। सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह ने कहा है कि अमिताभ बच्चन ने जया बच्चन को चुनाव में खड़े होने से मना किया है। मुलायम का कहना था, 'अमिताभ चाहते हैं कि जया बच्चन अभी कुछ दिन आराम करें, दरअसल अमिताभ को राजनीति पसंद नहीं है। '

मतलब साफ है कि जया ने आपसी रिश्तों की गरिमा रखते हुए अपने कदम पीछे किए हैं। जया के इस कदम के बाद माननीय अमर सिंह के चेहरे पर खुशी की लहर तो जरूऱ दौड़ी होगी, जो पिछले काफी दिनों से अपनी प्रिय भाभी जया बच्चन के सपा न छोड़ने के कारण आहत थे। हालाकिं उन्होंने अपने ब्लॉग पर इस बात का उल्लेख तो नहीं किया है लेकिन जो कुछ भी उन्होंने लिखा है उससे साफ जाहिर है कि वो अपनी प्रिय भाभी के कदम से काफी खुश हैं।

उन्होंने लिखा है, ' मैने बच्चन परिवार में सभी को अपना मनतन्य बताया था कि यदि जया जी “पार्टी पहले" के सिद्धांत के अनुरूप लड़ना ही चाहती है तो पूरे परिवार को और कम से कम मेरे अग्रज अमिताभ जी को इन्ही का साथ देना चाहिए। दिल्ली में पत्रकारों से अनौपचारिक वार्ता के दौरान मैने जया जी को बधाई भी दे दी थी और अपनी पुरानी पार्टी से अनुरोध किया था कि जया जी को पार्टी का प्रथम उम्मीदवार बनाए एवं बागी विधायक जो समाजवादी पार्टी से अलग हो कर मुझसे जुड़े हो उनके मत जया जी के खाते में आवंटित ना करें। परिवार राजनीति से दूर दूर तक निकट ना जाए यह मेरे बड़े भाई अमिताभ जी का निजी निर्णय है, आज सुबह भी मैने उनसे प्रार्थना की यदि जया जी लड़ना चाहती हो तो उन्हें लड़ने दे। '

सब जानते हैं कि वाकपटुता में अमर सिंह का जवाब नहीं है। उन्होंने अपने हाल-ए-दिल को कुछ ऐसे बयां किया कि दर्द भी कह दिया, इल्जाम भी लगा दिया और ये भी कह दिया कि हम शिकायत नहीं कर रहे। फिलहाल अमर सिंह की मंशा को जया बच्चन ने पूरा करते हुए अपने कदम पीछे कर लिए, अब शायद जया को 'प्रिय भाभी' कहने वाले अमर सिंह को लगे कि जया के लिए वो भी 'प्रिय देवर' ही है। खैर कुल मिला कर सार इतना ही आज 'मुलायम' की 'राजनीति' पर 'जया' का 'अमर प्रेम' भारी है।

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