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लैला ने 23 जानें लीं, अब उड़ीसा की ओर

By Staff
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Laila

उमर फ़ारूक़, बीबीसी संवाददाता, हैदराबाद

चक्रवाती तूफ़ान 'लैला' ने आंध्र प्रदेश के तटीय ज़िलों, ख़ासकर प्रकाशम, गुंटूर और कृष्णा ज़िलों में व्यापक तबाही मचाई है और जनजीवन को अस्तव्यस्त कर दिया है. तटीय इलाक़ों में कई जगह भारी बारिश हुई है और इसकी वजह से सड़क और रेल यातायात ठप्प हो गया है. प्रकाशम ज़िले में मिट्टी धसकने से हुई चार लोगों की मौत के साथ ही वहाँ मरने वालों की संख्या 23 हो गई है. अधिकारियों का कहना है कि तूफ़ान से कम से कम 10 लाख लोग प्रभावित हुए हैं और 50 हज़ार लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं.

इस बीच मौसम विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि हालांकि लैला का असर कम हुआ है लेकिन इसकी विनाशकारी क्षमता अभी भी बची हुई है. उनके अनुसार अब तूफ़ान उड़ीसा की ओर बढ़ रहा है लेकिन इसके एक बार फिर बंगाल की खाड़ी में आकर शक्तिशाली होने के आसार हैं. इसके बाद तूफ़ान पश्चिम बंगाल की ओर बढ़ेगा, जहाँ तटीय इलाक़ों में पहले से ही सतर्क रहने की चेतावनी जारी कर दी गई है.

आंध्र प्रदेश के तटीय इलाक़ों में गुरुवार को रात भर भी तेज़ हवाओं के साथ बारिश होती रही. प्रकाशम ज़िले के अड्डंकी में चार घंटों में 55 सेंटीमीटर बारिश हुई है. इसे बारिश के एक रिकॉर्ड की तरह देखा जा रहा है. इसके अलावा कई जगह 30 से 40 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई है. अधिकारियों के अनुसार कोटापट्टनम में 35, नागलूपलापाडू में 34.2 और ओंगोले में 32.2 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई है.

बारिश की वजह से कई इलाक़ों में पानी भरा हुआ है और बिजली गुल हो गई है. कई जगह से करंट लगने से हादसों की ख़बरें भी हैं. मौसम विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि हालांकि तूफ़ान कमज़ोर पड़ गया है लेकिन फिर भी अगले 12 घंटों तक राज्य में एहतियात बरतना ज़रूरी है क्योंकि इस बीच 90-95 किलोमीटर की रफ़्तार से हवाएँ चल सकती हैं.

मौसम विभाग के ताज़ा बुलेटिन के अनुसार जो तूफ़ान आंध्र के ऊपर है वह अब उत्तरी दिशा में बढ़ेगा और उड़ीसा से होते हुए, बंगाल की खाड़ी के उत्तरी छोर से होकर वापस समुद्र में दाख़िल होगा. मौसम विभाग के अधिकारियों के अनुसार अब इससे पश्चिमी बंगाल को ख़तरा हो सकता है. उनका कहना है कि पश्चिमी बंगाल में छह तटवर्ती ज़िलों – उत्तरी और दक्षिणी 24 परगना, पूर्वी मिदनापुर, हावड़ा और हुगली में लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है.

तूफ़ान और बारिश की वजह से जगह-जगह पानी भर गया है और इससे सड़क और रेल यातायात दोनों बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. दक्षिण रेलवे और दक्षिण-मध्य रेलवे को इसकी वजह से कम से कम 60 ट्रेनें रद्द करनी पड़ी हैं. इनमें कई लंबी दूरियों की ट्रेनें हैं और कुछ छोटी दूरी की पैसेंजर ट्रेनें हैं. जो ट्रेनें चल भी रही हैं उनके समय से काफ़ी देर से चलने की ख़बरें हैं. तूफ़ान ने सड़क परिवहन को भी बुरी तरह से प्रभावित किया है.

आंध्र और तेलंगाना के बीच कई जगह बस सेवाएँ रद्द कर दी गई हैं. चेन्नई से कोलकाता को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक पाँच में बारिश की वजह से जाम लगा हुआ है. बताया गया है कि चार-पाँच किलोमीटर तक हज़ारों वाहन सड़क पर खड़े हुए हैं. अधिकारियों का कहना है कि राजकीय राजमार्ग पर कई जगह छोटे पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं और सड़कों में कई जगह चार-पाँच फुट पानी भरा हुआ है. सेना के जवान राज्य में राहत और बचाव कार्य में लगे हुए हैं.

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