ईरान के ख़िलाफ़ नए प्रतिबंधों का प्रस्ताव

Iran
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के ख़िलाफ़ पेश किए गए नए प्रतिबंध के प्रस्ताव में ईरान के नौपरिवहन को निशाना बनाया गया है. नए प्रतिबंध प्रस्तावों में अन्य बातों के अलावा इस बात का संदेह होने पर कि ईरानी जहाज से परमाणु या मिसाइल कार्यक्रम से संबंधित कोई सामग्री ले जाई जा रहा है, तो उसकी जाँच की जा सकेगी.

ये प्रस्ताव अमरीका ने पेश किया और इसे सुरक्षा परिषद के चार स्थाई सदस्यों-रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस का समर्थन हासिल है. नए प्रस्ताव में ईरान को भारी हथियार जैसे हमला करने वाले हेलिकॉप्टर, युद्धपोत और मिसाइल बेचने पर पाबंदी लगाने की भी बात शामिल है. उल्लेखनीय है कि इसके पहले ईरान, ब्राज़ील और तुर्की के बीच परमाणु ईंधन की अदला-बदली के बारे में समझौता हुआ था.

इन तीनों देशों का कहना है कि इस समझौते के बाद अब ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर उसके ख़िलाफ़ और प्रतिबंध लगाने की ज़रूरत ही नहीं रह जाती है. इस समझौते में व्यवस्था है कि ईरान अपने असैनिक परमाणु कार्यक्रम की ज़रूरत पूरी करने के लिए यूरेनियम संवर्धन के लिए तुर्की भेजेगा.

यूरोपीय देशों का यह प्रस्ताव था कि ईरान अगर विदेशों में अपना यूरेनियम संवर्धन के लिए भेजे तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएँ दूर हो जाएंगी. लेकिन तुर्की और ब्राज़ील के साथ ईरान के इस समझौते का समाचार अमरीका और उसके सहयोगी देशों में ज़्यादा गर्मजोशी के साथ स्वीकार नहीं किया गया. हिलेरी क्लिंटन ने मंगलवार को कहा कि ईरान, तुर्की और ब्राज़ील के बीच इस समझौते के बारे में अब भी बहुत से प्रश्न अनुत्तरित बचे हैं.

बढ़ता दबाव

इसके पहले अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा था कि ईरान के ख़िलाफ़ और ज़्यादा प्रतिबंध लगाने के एक नए प्रस्ताव पर प्रमुख शक्तिशाली देशों के बीच सहमति हो गई है. हिलेरी क्लिंटन का कहना था, "रूस और चीन के सहयोग से हम एक मज़बूत प्रस्ताव पर सहमत हुए हैं."

ग़ौरतलब है कि रूस और चीन इससे पहले तक ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने के प्रस्तावों का विरोध करते रहे हैं. अमरीका और उसके पश्चिमी सहयोगी देशों का मानना है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है लेकिन ईरान का कहना है कि वो कोई परमाणु हथियार नहीं बना रहा है बल्कि देश में ऊर्जा ज़रूरतें पूरी करने के लिए असैनिक परमाणु कार्यक्रम चलाया जा रहा है.

तुर्की के साथ समझौते का हवाला देते हुए हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि ईरान सरकार इस तरह के तरीक़ों से प्रमुख देशों का दबाव हटाने की कोशिश कर रहा है. हिलेरी क्लिंटन ने कहा, "हम नहीं समझते कि यह सिर्फ़ कोई संयोग हो सकता है कि जब हम न्यूयॉर्क में प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे थे तभी ईरान का तुर्की के साथ ये समझौता हुआ." उन्होंने कहा, "सच बात ये है कि हमने रूस और चीन को साथ ले लिया है और इस सप्ताह के आरंभ में ही प्रस्ताव के मसौदे पर बातचीत हो गई थी. इससे ईरान पर दबाव बढ़ा है जिसे ईरान सरकार किसी भी तरह कम करने की कोशिश में लगी थी."

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