थाईलैंड में हिंसा, प्रदर्शनकारियों ने अवरोध लगाए (लीड-1)

प्रधानमंत्री अभिसित वेज्जाजीवा ने तीन दिन से जारी हिंसा में मृतकों की संख्या 24 तक पहुंचने के बाद बैंकाक में कर्फ्यू लगाने और सभी स्कूलों को बंद करने की घोषण की।

सेंटर फॉर रिजोल्यूशन ऑफ इमरजेंसी सिचुएशन (सीआरईएस) ने बाद में कहा कि कर्फ्यू की योजना को टाल दिया गया है।

सेना के सहायक चीफ्स ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल अक्सारा केरदपॉल ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है। कर्फ्यू से ऐसे लोग प्रभावित होंगे जो प्रदर्शनों में शामिल नहीं हैं। परंतु सीआईसी स्थिति के अनुसार कर्फ्यू लगाने के बारे में फिर विचार करेगा।

समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार परेशानियों से घिरे प्रधानमंत्री ने राष्ट्रव्यापी प्रसारण में कहा कि करीब 400 पब्लिक स्कूल अगले शैक्षणिक सत्र के लिए सोमवार से खुलने वाले थे लेकिन वे हफ्ते भर बंद रहेंगे।

सुरक्षा बलों और हजारों सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच गत तीन अप्रैल से टकराव जारी है।

प्रदर्शनकारी, जिनमें से ज्यादातर शहरी और ग्रामीण गरीब हैं, संसद को फौरन भंग कर नए चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा से राजनीतिक और वित्तीय समर्थन मिल रहा है। शिनावात्रा को 2006 में फौजी बगावत में सत्ता से बेदखल कर दिया गया था।

प्रदर्शन स्थल को घेरने के सुरक्षा बलों के प्रयासों को प्रदर्शनकारियों द्वारा अपनाई जा रही छापामार पद्धतियों ने नाकाम कर दिया।

वेज्जाजीवा ने रविवार को अपने प्रसारण में कहा, "हथियारबंद आतंकवादी हिंसा भड़का रहे हैं। सरकार को इनके खिलाफ कार्रवाई करने की जरूरत है।"

उन्होंने कहा कि प्रदर्शन ऐसी स्थिति में पहुंच गया है जहां उसे शांतिपूर्ण तरीकों से समाप्त कराना संभव नहीं है।

वेज्जाजीवा ने संसद को समयपूर्व भंग करवाकर नवंबर में चुनाव कराने की पेशकश की थी लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इसे ठुकरा दिया था।

गुरुवार को हिंसा उस समय तेज हो गई थी जब प्रदर्शनकारियों के नेता मेजर जनरल खत्तिया स्वासीदिपोल को संवाददाताओं को साक्षात्कार देते समय गोली मार दी गई थी। वह अभी तक कोमा में हैं।

गुरुवार से हिंसक घटनाओं में 24 लोग मारे गए हैं और 215 के करीब घायल हुए हैं, इनमें चार विदेशी पत्रकार भी शामिल हैं। शनिवार को आठ मौते हुईं थीं। सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए गोलियां चलाई थीं।

थाईलैंड बढ़ती हिंसा के प्रति अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने चिंता जाहिर की है और समस्या के शांतिपूर्ण समाधान का अनुरोध किया है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने दोनों पक्षों से हिंसा को फैलने से रोकने के लिए हरसंभव कदम उठाने का अनुरोध किया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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