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मनीपुर में नाकेबंदी से खाद्य पदार्थों की कमी

By Staff
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नाकेबंदी से खाद्य पदार्थों की कमी
नागालैंड और मणिपुर के बीच पिछले दस दिनों से जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए वरिष्ठ भारतीय अधिकारी वहाँ पहुंच गए हैं. नागा आदिवासियों ने पिछले दस दिन से मणिपुर से सटे इलाकों की नाकेबंदी की हुई है. इस कारण मणिपुर देश के बाक़ी हिस्सों से कट गया है.

नाकेबंदी के कारण न सिर्फ़ मणिपुर में खाद्य पदार्थों की कमी हो गई है बल्कि अंदरूनी इलाक़ों में रहने वाले नागा लोगों को भी मुश्किल हो रही है. कई अस्पतालों में सर्जरी नहीं की जा रही क्योंकि ऑक्सिज़न सिलेंडर नहीं है. मणिपुर ज़रूरी सामग्री के आवागमन के लिए दूसरे क्षेत्रों पर निर्भर है. देश के अन्य इलाक़ों से ट्रक नागालैंड के ज़रिए मणिपुर पहुँचते हैं.

ये गतिरोध उस समय शुरु हुआ जब नागा अलगाववादी नेता थुइंगालेंग मुईवा ने कहा कि वे मणिपुर में अपने गाँव का दौरा करेंगे. लेकिन राज्य सरकार ने 'सुरक्षा कारणों" का हवाला देते हुए उनके आगमन पर प्रतिबंध लगा दिया था. समस्या को सुलझाने के लिए गृह सचिव जीके पिल्लई मंगलवार से ही मणिपुर और नागालैंड के मुख्यमंत्रियों और थुइंगालेंग मुईवा के साथ बातचीत कर रहे हैं. नागालैंड में पत्रकारों से बात करते हुए जीके पिल्लई ने कहा कि कई विकल्पों पर बात चल रही है हालांकि कोई हल नहीं निकल पाया है.

विवाद

मुईवा अलगाववादी गुट नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नागालैंड के महासचिव हैं. नागा समस्या को सुलझाने के लिए मुईवा पिछले 13 सालों से भारत सरकार के साथ बात कर रहे हैं. लेकिन छह दशक पुरानी नागा समस्या का हल फिलहाल नज़र नहीं आ रहा. दरअसल मुईवा की माँग है कि मणिपुर, असम और अरूणाचल प्रदेश के नागा-बहुल इलाक़ों को वर्तमान नागालैंड में मिलाकर ग्रेटर नागालैंड बनाया जाए.

इन राज्यों में नागा गुट ग्रेटर नागालैंड के लिए अभियान छेड़े हुए हैं, ख़ासकर मणिपुर में.नागा गुटों की नाकेबंदी के कारण मणिपुर-नागालैंड सीमा पर हज़ारों ट्रक अटके पड़े हैं. मणिपुर सरकार का कहना है कि उसने राज्य में मुईवा के आने पर इसलिए रोक लगाई क्योंकि वो नागा इलाक़ों में कई रैलियों को संबोधित करने वाले थे.

मणिपुर के मुख्यमंत्री इबोबी सिंह ने कहा, “इससे स्थिति और बिगड़ जाएगी क्योंकि पहाड़ी ज़िला परिषदों में चुनावों की रोकने के लिए नागा गुट पहले से ही प्रदर्शन कर रहे हैं."

मुख्यमंत्री ने कहा है कि जब तक मुईवा ग्रेटर नागालैंड की माँग छोड़ नहीं देते उन्हें मणिपुर आने नहीं दिया जाएगा. जबकि मुईवा का कहना है कि चाहे कुछ हो जाए वे अपने पैतृक गांव सोमदाल ज़रूर जाएँगे. गृह सचिव पिल्लई कोशिश कर रहे हैं कि कोई ऐसा हल निकल आए जिससे दोनों पक्षों की बात रह जाए.

अधिकारियों के मुताबिक वे अलगाववादी नेता मुईवा से अनुरोध कर रहे हैं कि वो सोमदाल जाकर कोई राजनीतिक रैली को संबोधित न करें जबकि मणिपुर सरकार से वे कह रहे हैं कि मुईवा को मणिपुर में आने की अनुमित दे. पर मुईवा का कहना है कि वे मणिपुर सरकार की निगरानी के तहत वहाँ नहीं जाएँगे, इबोबी सिंह इसका उलटा चाहते हैं.

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