करियर व घर के बीच सामंजस्य बिठाती महिलाएं (9 मई को मातृ दिवस पर विशेष)

नई दिल्ली, 8 मई (आईएएनएस)। कथक नृत्यांगना शोवना नारायण, आभूषण डिजाइनर अल्पना गुजराल और कारपोरेट जगत में कार्यरत शालिनी नायर के कार्यक्षेत्र अलग-अलग हैं लेकिन फिर भी इनमें एक समानता है और वह है एक साथ कई भूमिकाएं निभाने की कला।

एक महिला एक बेटी, पत्नी, मां और एक समझदार व्यक्ति की भूमिका निभाती है। जो महिलाएं अपना करियर बना रही हैं वह अपने पेशेवर जीवन को भी पूर्णता से प्रबंधित करती हैं।

नारायण के लिए अपने ऑस्ट्रिया में राजनयिक पति के साथ लंबी दूरी का रिश्ता बनाए रखने और दो अलग व्यवसाइयों, एक भारतीय सिविल सेवा में नौकर और दूसरी नृत्यांगना के बीच सामंजस्य बिठाना बहुत मुश्किल होता है।

नृत्य के लिए पद्मश्री हासिल कर चुकी नारायण कहती हैं, "पहले लोगों की इस मानसिकता को तोड़ना मुश्किल था कि एक व्यक्ति दो कामों के बीच सामंजस्य बिठा सकता है। मेरे पति ऑस्ट्रियाई राजनयिक हैं। शादी के बाद से ही वह दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में कार्यरत रहे। लोगों का यह सोचना सामान्य बात है कि जहां वह जाएंगे मैं भी वहीं रहूंगी।"

वह कहती हैं कि लोगों की मानसिकता बदलना मुश्किल है लेकिन यदि आपके पति व परिवार आपको समझते हैं तो वे आप जो करना चाहें उसे करने की इजाजत देते हैं।

प्रख्यात कलाकार सतीश गुजराल की बेटी अल्पना गुजराल कहती हैं कि महिलाएं कुछ भी करें लेकिन उन्हें कभी भी अपनी पहचान नहीं खोना चाहिए।

गुजराल ने आईएएनएस से कहा, "मैंने खुद किसी भूमिका में बंधने की बजाए भूमिका को बांधना सीखा है। यद्यपि आप विभिन्न भूमिकाएं निभाती हैं लेकिन इन्हें निभाते हुए आपको स्वयं को नहीं खो देना चाहिए।"

यदि आप कारपोरेट जगत में कार्यरत हैं तो आपके लिए बैठकें करने, समय सीमा पर काम निपटाने और व्यक्तिगत प्रतिबद्धताओं के बीच सामंजस्य बनाना बच्चों के खेल की तरह आसान नहीं होता है।

फैशन ब्रांड जियोवानी की विपणन प्रमुख नायर स्वीकार करती हैं कि कारपोरेट जगत में सफल होने के लिए प्रयासों और ऊर्जा की आवश्यकता होती है लेकिन अनुशासित और समयनिष्ठ रहकर ऐसा किया जा सकता है।

नायर कहती हैं, "दो अलग क्षेत्रों में सामंजस्य के लिए बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। बच्चों के साथ बिताने के लिए बहुत कम समय मिलता है इसलिए समय का प्रबंधन बहुत महत्वपूर्ण है। इसके अलावा अभिभावकों के बीच जिम्मेदारियों बंटने से भी बहुत मदद मिलती है।"

नारायण मानती हैं कि महिलाओं को ईमानदार, सच्चा और समर्पित होना चाहिए इसके साथ ही उन्हें अपने जीवन को भी संवारना और उसे जैसा चाहें वैसा आकार देना चाहिए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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