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ग्रीस के प्रदर्शनों में तीन की मौत

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    ग्रीस के प्रदर्शनों में तीन की मौत

    ग्रीस की राजधानी एथेंस में सरकारी ख़र्च में कटौती और करों में वृद्धि के ख़िलाफ़ हो रहे प्रदर्शनों के दौरान कम से कम तीन लोग मारे गए हैं.

    ये मौतें तब हुईं जब प्रदर्शनकारियों ने एक बैंक को आग लगा दी.

    अग्निशमन कर्मचारियों का कहना है कि मार्फ़िन बैंक की इमारत में तीन शव मिले हैं. दो अन्य इमारतों को भी आग लगाई गई है.

    प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पैट्रोल बम फेंके तो पुलिस ने आंसू गैस और काली मिर्च के स्प्रे का इस्तेमाल किया.

    आर्थिक पैकेज

    ग्रीस को आर्थिक संकट से उबारने के लिए 110 अरब यूरो का सहायता पैकेज दिया गया है लेकिन उसके साथ कुछ शर्तें जुड़ी हैं.

    ग्रीस के प्रधानमंत्री जॉर्ज पपेन्द्रू ने ख़र्च में कटौती के उपायों को जनता के भारी त्याग की संज्ञा दी है जबकि विपक्ष का कहना है कि सरकार ने देश का नियंत्रण विदेशी बैंको के हवाले कर दिया है.

    इस प्रस्ताव पर इस सप्ताह के अंत तक मतदान होगा जिसे पारित कराने में सरकार को कोई दिक़्क़त नहीं आएगी क्योंकि पासॉक पार्टी को संसद में बहुमत हासिल है.

    इस प्रस्ताव में वेतन वृद्धि रोकने, पेंशन में कटौती करने और टैक्स बढ़ाने की बात है. यूं तो विपक्षी दल इस बात से सहमत हैं कि देश भारी आर्थिक संकट से गुज़र रहा है लेकिन वो इस प्रस्ताव का विरोध करेंगे.

    कम्युनिस्ट पार्टी के नेता अलेका पापेरिगा का कहना है कि आर्थिक पैकेज के साथ जुड़ी शर्तें कठोर हैं और पूंजीवाद देश के ग़रीब मज़दूरों का शोषण कर रहा है.

    अभी छह महीने पहले ही पासॉक पार्टी की सरकार वेतन वृद्धि और बिना बाहरी मदद के देश को आर्थिक संकट से उबारने के वादे पर सत्ता में आई थी. लेकिन ये सभी वादे एक तरफ़ कर दिए गए हैं.

    बाज़ारों में घबराहट

    यूरोपीय बाज़ारों में इस स्थिति को लेकर भारी घबराहट है और शेयर बाज़ारों में गिरावट आई है. बाज़ारों को लगता है कि ग्रीस अपने क़र्ज़ को चुकाने में असमर्थ रहेगा.

    पिछले सप्ताहांत यूरो मुद्रा वाले देशों ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की सहायता से 110 अरब यूरो के आर्थिक पैकेज पर हस्ताक्षर किए थे. जिससे ग्रीस अपने एक तिहाई क़र्ज़ को चुका सके.

    इसके जवाब में ग्रीस की सरकार ने अपने सार्वजनिक व्यय में भारी कटौती करने का वादा किया है जिससे उसके बजट घाटे में तीन सालों में 30 अरब यूरो की कटौती की जा सके.

    बाज़ार में घबराहट इस बात को लेकर है कि यूरो क्षेत्र के देश कब तक कमज़ोर देशों की मदद करते रहेंगे और ग्रीस की वित्तीय समस्याएँ दक्षिणी यूरोप के अन्य देशों तक फैल सकती हैं जिनमें स्पेन, पुर्तगाल और इटली तक की बात हो रही है.

    जर्मनी की संसद में इस आर्थिक पैकेज पर बहस चल रही है क्योंकि इसका सबसे बड़ा हिस्सा जर्मनी को देना है. चांसलर एंगेला मरकेल ने सांसदों से आग्रह किया है कि वो प्रस्ताव का समर्थन करें.

    उन्होने कहा, "सीधी सी बात ये है कि यूरोप का भविष्य ख़तरे में है".

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