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बेल्जियम बुर्क़े पर प्रतिबंध के क़रीब

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    बेल्जियम बुर्क़े पर प्रतिबंध के क़रीब

    बेल्जियम की संसद के निचले सदन ने एक ऐसा विधेयक पारित किया है जिसके तहत महिलाओं के सार्वजनिक स्थानों में बुर्क़ा पहनने पर प्रतिबंध लग जाएगा. इसके ख़िलाफ़ एक भी वोट नहीं पड़ा है.

    यदि यह सीनेट में भी पारित होता है तो युरोप में बेल्जियम इस तरह की रोक लगाने वाला पहला देश बन जाएगा.

    ग़ौरतलब है कि बेल्जियम की क़रीब पाँच लाख मुस्लिम आबादी में सिर्फ़ 30 महिलाएँ इस तरह का बुर्क़ा पहनती हैं.

    बीबीसी संवाददाता के अनुसार बेल्जियम के सांसद सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इस क़ानून का समर्थन करते रहे हैं. अन्य सांसद बुर्क़े को महिलाओं के दमन का प्रतीक बताते हैं.

    सड़कों, अस्पतालों, पार्कों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे किसी भी कपड़े या वेषभूषा पहनने पर रोक होगी, जिससे पहनने वाले की पहचान करने में दिक़्क़त हो.

    बेल्जियम की गठबंधन सरकार में शामिल पाँचों दलों ने इसका समर्थन किया. अब इस विधेयक पर सीनेट में बहस होगी जहाँ इसकी शब्दावली पर बहस हो सकती है जिसके कारण इसके पारित होनों में कुछ देर हो सकती है.

    इसके बाद जून या जुलाई तक यह क़ानून बनकर लागू हो सकता है.

    क़ानून का प्रस्ताव रखने वाले सांसद डैनियल बैक्वेलिन के मुताबिक़, "इसका धर्म से कोई लेना-देना नहीं है. हम धार्मिक स्वतंत्रता के हक़ में हैं. मुझे नहीं लगता बुर्क़ा एक धार्मिक प्रतीक है. ये सबसे पहले राजनीतिक मुद्दा है. और ये हमारे और दुनियाभर के मूल सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है."

    लेकिन इसके विरोध में कई आवाज़ें भी उठ रही हैं.

    बेल्जियम की मुस्लिम एक्ज़ेक्यूटिव ने इस प्रतिबंध की निंदा की है और कहा है कि इसकी वजह से बुर्क़ा पहनने वाली महिलाएं अपने घरों में क़ैद हो कर रह जाने पर मजबूर हो जाएंगी.

    बुर्क़ा पहनने वाली एक महिला सलमा कहती हैं, "ये हमारी पहचान या आत्म-सम्मान पर आघात नहीं करता. मैं जितनी बुर्का पहनने वाली महिलाओं को जानती हूं, वे अपनी ख़ुशी से ऐसा करती हैं. लोग अगर इसे नहीं समझना चाहते हैं तो हम कुछ नहीं कर सकते."

    ब्रसेल्स फ़्री युनिवर्सिटी के धर्म और धर्म-निर्पेक्षता विभाग की कैरोलीन सागेस्सर इस प्रतिबंध को मौक़ापरस्ती बताती हैं. कैरोलीन के मुताबिक, "अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में, ख़ास तौर पर अफ़ग़ानिस्तान को देखते हुए, मुझे नहीं लगता कोई बुर्क़ा पहनने की आज़ादी की पैरवी करता होगा."

    साथ में उनका ये भी मानना है, "लेकिन इसके लिए क़ानून बनाना हथौड़े से मक्खी मारने जैसा है. इतनी कम महिलाएँ पूरा बुर्क़ा पहनती हैं कि इसकी ज़रूरत ही नहीं है." बेल्जियम की क़रीब पाँच लाख मुस्लिम आबादी में सिर्फ़ 30 महिलाएँ इस तरह का बुर्क़ा पहनती हैं.

    क़ानून तोड़ने पर 15 से 25 यूरो (885 से 1475 रूपए) या सात दिन की जेल की सज़ा हो सकती है.

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