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    ग्रीस के वित्तीय संकट पर ओबामा चिंतित

    By Staff
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    ग्रीस के वित्तीय संकट पर ओबामा चिंतित
    ग्रीस के वित्तीय संकट पर अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल से फ़ोन पर चर्चा की है. व्हाइट हाउस का कहना है कि दोनों नेता ग्रीस के संकट को सुलझाने में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और यूरोपीय संघ से वक्त रहते मदद की अहमियत पर सहमत थे.

    इधर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) के प्रमुख डोमिनिक स्ट्रॉस-कान बर्लिन में हैं और जर्मन सरकार के साथ ग्रीस के लिए पैकेज पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं. उनके मुताबिक जल्द ही कुछ नहीं किया गया तो इस संकट का असर बाकी यूरोपीय देशों पर भी पड़ने लगेगा.

    जर्मनी ने कहा है कि ग्रीस को आर्थिक संकट से निकालने के लिए 120 अरब डॉलर से भी ज़्यादा का राहत पैकेज चाहिए होगा. लेकिन यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश जर्मनी ग्रीस को वित्तीय सहायता देने के बारे में अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं है. जर्मनी का कहना है कि पहले उसे ग्रीस से आश्वासन चाहिए कि वो सरकारी खर्चों मे कमी लाकर देश में मितव्ययिता लागू करेगा.

    आईएमएफ़ की चेतावनी

    अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रमुख डोमिनिक स्ट्रॉस-कान ने बर्लिन में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए साफ़ शब्दों में कहा कि ग्रीस के पास संभलने के लिए बहुत कम वक्त है. उनका कहना था, "ग्रीस में ही नहीं बल्कि पूरे यूरोप में और विश्व में हर दिन के साथ स्थिति गंभीर होती जा रही है. "

    उन्होंने यूरोपीय संघ के साथ मिलकर ग्रीस के लिए बनाए जा रहे राहत पैकेज में जर्मनी की भूमिका पर ज़ोर दिया. लेकिन अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रमुख की कोशिशों का अबतक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है.

    जर्मनी में अगले महीने एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय चुनाव होने हैं, जिसकी वजह से सरकार कोई जनविरोधी फ़ैसला नहीं लेना चाहती. ताज़ा सर्वेक्षणों के मुताबिक जर्मनी में ज़्यादातर लोग बड़ी वित्तीय सहायता के ख़िलाफ़ हैं.

    जाहिर है चांसलर एंगेला मर्केल हर कदम फूंक-फूंक कर रख रही हैं. मर्केल ने कहा, "इतना तो स्पष्ट है कि ग्रीस, यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के बीच चल रही बातचीत जल्दी किसी नतीजे पर पहुँचनी चाहिए. उसके बाद ही जर्मनी कुछ फ़ैसला कर पाएगा.'' उनका कहना था,''हम जानते हैं कि ये पूरे यूरोप पर असर डाल रहा है और हम ज़िम्मेदारी से पीछे नहीं हटेंगे."

    जनता में रोष

    इधर ग्रीस सरकार के उठाए कदमों से वहां की जनता आश्वस्त नहीं है और लोगों में कड़े आर्थिक क़दमों को लेकर गुस्सा बढ़ता जा रहा है और वे सड़कों पर उतर आए हैं. सेंटर फॉर यूरोपियन स्टडीज़ के एक ताज़ा सर्वेक्षण के मुताबिक ग्रीस में यूरो मुद्रा को अपनाने के बाद रोज़मर्रा की कई चीज़ें बाकी यूरोप के मुक़ाबले महंगी हो गईं हैं जबकि वेतन उतने नहीं बढ़े.

    ग्रीस सरकार के बजट की 30 फ़ीसदी राशि पेंशन और सामाजिक सुरक्षा में इस्तेमाल हो जाता है. मितव्ययिता के बाद अर्थव्यवस्था के और सिकुड़ने और बेरोज़गारी के बढ़ने की आशंकाएं जताई जा रही हैं.

    ग़ौरतलब है कि ग्रीस पर लगभग 300 अरब यूरो का कर्ज़ है और उसे अगले महीने अपने कर्ज़ की किस्त चुकाने के लिए साढ़े 11 अरब यूरो की व्यवस्था करनी है. इधर अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर ने ग्रीस की अर्थव्यवस्था को 'कबाड़" क़रार दे दिया है. इसका मतलब है कि ग्रीस अपने कर्ज़ का पूरा भुगतान करने में समर्थ नहीं है.

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