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सार्क नेताओं से बातचीत करेंगे मनमोहन

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    SAARC
    रेणु अगाल
    बीबीसी संवाददाता, थिम्पू से

    भारत के प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कहा है कि वो सार्क बैठक में सदस्य देशों के नेताओं से मुलाक़ात करेंगे. इसे पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय बातचीत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.

    भारत की तरफ से जिस तरह की बातें कही जा रही थीं कि पाकिस्तान आतंकवाद से लड़ने में गंभीरता नहीं दिखा रहा, मुंबई के हमलावरों को सज़ा दिलवाने के लिए कारगर क़दम नहीं उठा रहा, इन सब को भारत की व्यापक बातचीत या समग्र वार्ता की शुरुआत से बचने के रूप में देखा जा रहा था. वही पाकिस्तान के विदेश मंत्री की ओर से बातचीत को ही सही रास्ता बताने और बातचीत पर ज़ोर देने के बयान भी आते रहे.

    पर भारत का साफ़ संकेत ये है कि बातचीत होगी पर जल बटवारे और कुछ अन्य मुद्दों तक ही सीमित रहेगी. अभी शर्म अल शेख की तरह शिखर बैठक का समय नहीं आया है. इस बीच मुंबई के हमलों के मुख्य अभियुक्त अजमल कसाब की मांग कर और रोज़ नए सबूतों की पाकिस्तान की मांग ने भारत को कोई ज़्यादा आशान्वित नहीं किया.

    वही पाकिस्तान का कहना है कि भारत अब भी रिश्तों की बेहतरी नहीं, राजनीति कर रहा है यानि आरोपों का दौर जारी है. इस बीच एक भारतीय अधिकारी की पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोपों की जांच ने एक बार फिर दिखा दिया है कि दोनों देशो के रिश्ते कितने नाजुक हैं.

    सार्क के इन दो पड़ोसी देशों की छाया में सार्क के अच्छे अच्छे काम भी नज़रअंदाज़ हो जाते है. पर भारत पाकिस्तान के रिश्तों से अलग भी सार्क की एक दुनिया है जहाँ क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने के लिए कई ठोस क़दम लिए जा रहे हैं.

    बातचीत

    सार्क के महासचिव शीलकांत शर्मा ने बताया कि सार्क के राष्ट्राध्यक्ष बुधवार को शिखर बैठक में जलवायु परिवर्तन, व्यापार और सेवा क्षेत्र में सहयोग पर विचार कर 29 तारीख़ को इसे पारित कर देंगे. एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना था कि इस बैठक में प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए जल्द कार्रवाई के लिए भी एक समझौता लगभग तैयार था, पर पाकिस्तान ने इस पर और चर्चा की बात कर इसके कार्यान्वयन को होने नहीं दिया.

    इसी तरह सार्क देशों के बीच बेहतर संचार और संपर्क की कोशिशों में भी कुछ अड़चने आ रही हैं. पर कई कार्यक्रम है जिन पर 2008 की कोलंबो शिखर बैठक में या उसके पहले से काम चल रहा था, वो पूरी हो रही हैं.

    पहली बार सार्क विकास कोष के तहत घर में काम कर रही महिलाओं को प्रशिक्षण और रोज़गार स्वयं सेवी संस्था सेवा की मदद से किया जा रहा है और इन महिलाओ की बनाई चीज़ें सबह ब्रांड के तहत बेची जाएंगी. सेवा संगठन की मोनिका रैना कहती है कि महिलाओं को गरीबी से निकालने के लिए उनके काम को बाज़ार व्यवस्था से जोड़ने की कोशिश की जा रही है.

    शीलकांत शर्मा कहते है कि अब खाद्य बैंक तैयार है, दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय भी अगस्त से पढ़ाना शुरू कर देगा और साफ्टा पर बहुत काम हो रहा है. यानी सार्क के तहत काम जारी है और अगली बैठक जो कि मालदीव में होगी उसकी और निकट भविष्य की रूप रेखा भी तैयार हो रही है.

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