भाजपा ने सोरेन सरकार से समर्थन वापस लिया (लीड-2)
भाजपा महासचिव अनंत कुमार ने पार्टी संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में यह घोषणा की। उन्होंने कहा, "कटौती प्रस्ताव पर सोरेन ने सरकार के समर्थन में मतदान कर अनुचित काम किया है। इसे गंभीरता से लेते हुए भाजपा संसदीय बोर्ड ने सोरेन सरकार से समर्थन वापसी का निर्णय लिया।"
उन्होंने कहा, "झारखण्ड के उप-मुख्यमंत्री रघुबर दास झारखण्ड के राज्यपाल एम.ओ.एच. फारूक से मुलाकात कर पार्टी के निर्णय से अवगत कराएंगे।"
भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष दास ने कहा, "हम गुरुवार को समर्थन वापसी का पत्र राज्यपाल को सौंप देंगे। भाजपा के मंत्री भी राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप देंगे।"
दास ने आईएएनएस को बताया, "हमारी बुधवार को ही समर्थन वापसी का पत्र सौंपने की योजना थी, लेकिन यह योजना विफल हो गई। मैं गुरुवार को रांची पहुंचूंगा और पार्टी के मंत्रियों के साथ राज्यपाल से मुलाकात करूंगा।"
संसद भवन में हुई भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक में वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी, लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज, राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली सहित अन्य सदस्य मौजूद थे। इसके अलावा झारखण्ड से पूर्व मुख्यमंत्री व महासचिव अर्जुन मुंडा, सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और उप-मुख्यमंत्री रघुबर दास भी इस बैठक में शामिल हुए।
इस बीच सोरेन एक विशेष विमान से बुधवार को रांची पहुंचे और सीधे अपने आवास पर चले गए। सोरेन ने मीडिया कर्मियों से कोई बातचीत नहीं की और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों के साथ बैठक की।
कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने इस बीच संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि भाजपा ने समर्थन वापस लेकर राज्य में राजनीतिक अस्थिरता पैदा कर दी है। प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों पर पार्टी की नजर है।
इससे पहले, कांग्रेस नेता व झारखण्ड के प्रभारी केशव राव ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "सोरेन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के सदस्य हैं। नैतिक रूप से वह सरकार के समर्थन में मतदान करने को बाध्य हैं।"
उल्लेखनीय है कि सोरेन ने मंगलवार को लोकसभा में विपक्ष की ओर से लाए गए कटौती प्रस्ताव में केंद्र सरकार के समर्थन में मतदान किया था। इसके बाद उन्होंने मंगलवार रात भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी से भेंटकर अपनी सफाई पेश की थी।
झारखण्ड में गत वर्ष दिसम्बर महीने में सोरेन के नेतृत्व में भाजपा और झामुमो की गठबंधन सरकार बनी थी। ऑल झारखण्ड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) के पांच विधायकों ने भी इस गठबंधन सरकार का समर्थन किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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