प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध के पक्ष में नहीं हैं रमेश
राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान उन्होंने कहा, "मैं प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं हूं क्योंकि यह उद्योग काफी लोगों की रोजी-रोटी देता है। समस्या संग्रह प्रणाली के साथ है और हमें इसे मजबूत करने की जरूरत है। दरअसल, प्लास्टिक हमारे स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह नहीं है लेकिन समस्या घटिया और पुनर्चक्रित प्लास्टिक से है।"
उन्होंने कहा कि 20 साल पहले जब पॉलीथिन अस्तित्व में आया तब से वनों की कटाई में कमी आई और उन पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है।
रमेश ने कहा, "हमें थोड़ी सर्तकता बरतने की जरूरत है। कई राज्यों ने पॉलीथिन के प्रयोग पर पाबंदी लगा दी है। केंद्र सरकार भी ऐसे नियमों की घोषणा कर सकती है लेकिन इसे लागू कराने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की और नगर पालिकाओं की है।"
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि देश में रोजाना करीब 15,777 टन प्लास्टिक का उत्पादन होता है।
उन्होंने कहा, "प्लास्टिक के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए हम आर्थिक प्रोत्साहन देने के बारे में सोच रहे हैं। इस संबंध में हमने कुछ अध्ययन भी किया है। मेरे विचार से अपने नियमों को अच्छी तरह से लागू करवाने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन एक सही रास्ता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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