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चॉकलेट खाने वालों को 'अवसाद'

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    चॉकलेट खाने वालों को 'अवसाद'

    एक ताज़ा शोध से पता चला है कि हमेशा चॉकलेट खाने वालों में अवसाद की अधिक संभावना रहती हैं.

    आर्काइव ऑफ़ इंटरनल साइंस में छपी एक शोध के अनुसार कम चॉकलेट खाने वालों की तुलना में सप्ताह में कम से कम चॉकलेट का एक बार खाने वालों में निराशा की भावना अधिक रहती है.

    वैसे आम तौर पर अनेक लोगों का मानना है कि चॉकलेट में ताज़गी और जोश भरने की शक्ति है. शोध करने वाली टीम का कहना है कि लोगों की यह राय सही हो सकती है, पर इसके वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं.

    उनका कहना है कि वे इस संभावना से इनकार नहीं कर सकते कि चॉकेलट अवसाद के इलाज नहीं बल्कि कारण हो सकता है.

    ताज़ा शोध क़रीब एक हज़ार व्यस्कों पर किया गया है और पाया गया कि जिन लोगों ने अधिक चॉकलेट खाए उनके मूड ख़राब हुए.

    जिन लोगों ने एक महीने में 28 ग्राम के छह से अधिक चॉकलेट बार खाए, उनमें अधिक अवसाद पाया गया.

    लेकिन अधिक चॉकलेट खाने का इतना बुरा असर नहीं पड़ा कि किसी व्यक्ति को डॉक्टर के पास जाना पड़ा.

    यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया की डॉक्टर नैटली और उनकी सहयोगियों का कहना है कि उनके निष्कर्ष की अनेक संभावित व्याख्या हो सकती है और इस व्याख्या की ज़रूरत भी है.

    डॉक्टर नैटली का कहना है, "शराब के विपरीत, ताज़गी बढ़ाने में चॉकलेट का अल्पकालिक फ़ायदा है और बहुत दिनों तक इसका बुरा प्रभाव भी नहीं है."

    हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि चॉकलेट सीधे तौर पर भी अवसाद का कारण हो सकता है.

    इस पर मानसिक रोग विशेषज्ञ ब्रिगेट ऑ कॉनेल का कहना है, " हम जो सोचते हैं और जो खाते हैं उन दोनों का बहुत ही गहरा संबंध होता है और कई लोग जब अवसाद या दबाव में होते हैं तो क्या खाना है या क्या नहीं खाना है उससे अच्छी तरह परिचित होते हैं."

    लेकिन उनका कहना है कि इस अध्ययन पर और अधिक शोध की ज़रूरत है.

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