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सरकार का फोन टैपिंग से इंकार, संसद ठप (राउंडअप)

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    केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदंबरम ने अपने बयान में इस बात से स्पष्ट रूप से इंकार किया कि सरकार ने फोन टैपिंग का आदेश दिया था, लेकिन सांसद इससे संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने मामले की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराए जाने की मांग की। परिणामस्वरूप लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दिन में तीन बार यानी दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी।

    दोनों सदनों में दिए अपने समान बयान में चिदंबरम ने कहा कि सरकार ने जांच की है लेकिन पाया गया है कि आउटलुक समाचार पत्रिका में फोन टैपिंग के आरोप से जुड़ी जो रिपोर्ट प्रकाशित हुई है, उसमें जरा भी सत्यता नहीं है।

    चिदंबरम ने कहा, "स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि न तो पूर्व की संप्रग (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) सरकार ने नेताओं के फोन टैप करने के आदेश दिए थे और न वर्तमान संप्रग सरकार ने ही।"

    उल्लेखनीय है कि एक पत्रिका की रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) महासचिव प्रकाश करात और कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के टेलीफोन टैप किए गए। इस रिपोर्ट के आने के बाद से विपक्षी दल सरकार के खिलाफ लामबंद हो गए हैं।

    चिंदबरम के बयान के दौरान भी सदन में हंगामा जारी रहा। उनका बयान खत्म होते ही विपक्षी सदस्य अध्यक्ष के आसन के निकट पहुंच गए और प्रधानमंत्री के बयान की मांग करने लगे। उसके बाद वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने घोषणा की कि मनमोहन सिंह इस मसले पर अपराह्न् 3.30 बजे बयान देंगे।

    लेकिन सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने के साथ ही शुरू हुए हंगामे के कारण दोपहर तक सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी थी और अपराह्न् भोजनावकाश के बाद जब सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई तो भी सदस्यों का हंगामा जारी रहा और कार्यवाही तीसरी बार स्थगित करनी पड़ी।

    चिदंबरम के बयान के पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने लोकसभा में कहा कि लगता है आपात काल के दिन देश में वापस लौट आए हैं।

    देश में 1975-77 के दिनों का जिक्र करते हुए आडवाणी ने एक ऐसे नए कानून की मांग की, जिससे इस बात की गारंटी सुनिश्चित हो सके कि सरकार राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ अपने अधिकारों का दुरुपयोग न कर पाए।

    राज्यसभा में भाजपा के एस.एस.अहलूवालिया, नजमा हेपतुल्ला, एम.वेंकैया नायडू और रविशंकर प्रसाद तथा वामपंथी पार्टियों के सीताराम येचुरी और डी.राजा, समाजवादी पार्टी और एआईएडीएमके के सदस्यों ने इस मुद्दे को उठाया।

    प्रश्न काल के बाद संसदीय कार्य राज्य मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि सरकार इस मसले पर बयान देगी लेकिन हंगामा नहीं थमा। इसके बाद सभापति हामिद अंसारी ने सदन की कार्यवाही दिन में 12 बजे तक स्थगित कर दी।

    कार्यवाही दोबारा आरंभ होने पर उप सभापति के. रहमान खान ने सदन को बताया कि सरकार इस मसले पर बयान देने को तैयार है। इसके बावजूद विपक्षी सदस्य शांत नहीं हुए। भाजपा नेता वैंकेया नायडू ने कहा, "सरकार हमारी बात को सुने बिना बयान कैसे दे सकती है?"

    हंगामे को देखते हुए कार्यवाही दूसरी बार 12.30 बजे तक स्थगित कर दी गई। कार्यवाही फिर आरंभ होने पर हंगामा जारी रहा। इसे देखते हुए सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।

    ज्ञात हो कि लगभग एक महीने के अवकाश के बाद 15 अप्रैल को शुरू हुए बजट सत्र के बाद संसद की कार्यवाही मुश्किल से चार दिनों तक सहज रूप में चल पाई है। शुरू में महंगाई और बाद में इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) विवाद के नाम संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही भेट चढ़ चुकी है।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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