बेटे ने कराई मां-बाप की शादी
रामनगर इलाके में रहने वाले संजय देवधर और सियाली देवधर की वर्ष 1994 में शादी हुई थी। सियाली महाराष्ट्र के जलगांव की रहने वाली थीं, जबकि संजय का नाता जबलपुर से था। शादी के कुछ वर्षो बाद ही दोनों में अहम् को लेकर टकराव होने लगा। दोनों के बीच एक बेटा सुमित आ चुका था। लेकिन टकराव इतना बढ़ा कि मामला न्यायालय पहुंचा और फिर तलाक की नौबत आ गई। तलाक के बाद बेटा पिता के पास रह गया।
सुमित को पिता के साथ रहते हुए यह छूट थी कि वह मां से जब चाहे न केवल फोन पर बात कर सकता है, बल्कि मिल भी सकता है। 10वीं कक्षा के विद्यार्थी सुमित को मां-बाप का अलग रहना तब सबसे ज्यादा खलता, जब स्कूल में पेरेंट्स (पालक) मीटिंग बुलाई जाती।
मीटिंग में मां-बाप दोनों के न आने की वजह बताते बताते वह तंग आ गया था।
सुमित बताता है कि उसने कोशिश की और माता-पिता को करीब लाने में सफलता हासिल की। उसने दोनों को साथ रहने के लिए भी सहमत कर लिया।
सुमित के इस काम में परिवार और परिचितों ने अहम भूमिका निभाई। बात आगे बढ़ी और दोनों ने बेटे की इच्छा के अनुरूप गुरुवार को आर्य समाज मंदिर में पूरे विधिविधान से दोनों ने दोबारा शादी कर ली। यज्ञ मे प्रज्वलित अग्नि में दोनों ने पुरानी बातों की आहूति देकर नई जिंदगी शुरू करने का संकल्प लिया।
संजय-सयाली के साथ सुमित की खुशी का ठिकाना नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि अब वह पिता के साथ मां का प्यार भी हासिल कर सकेगा।
सुमित कहता है कि उसे भरोसा था कि वह एक दिन अपने माता-पिता को मिलाकर रहेगा। वहीं संजय और सयाली कहते हैं कि अब वे कभी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ेंगे। उन्हें पता है कि अकेला रहकर उन्हें एक-दूसरे की खूब याद आती थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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