रोना शिशु के मस्तिष्क के लिए नुकसानदायक
समाचार वेबसाइट 'डेलीमेल डॉट को डॉट यूके' ने एक विशेषज्ञ के हवाले से बताया,"देर तक रोने वाला शिशु निराशा और थकान की वजह से बेहतर नींद नहीं ले सकता।"
बच्चों से जुड़ी किताबों की लेखिका लीच ने कहा,"यह केवल एक विचार नहीं है बल्कि इससे जुड़े पुख्ता सुबूत हैं कि ज्यादा रोने से बच्चों के मस्तिष्क के विकास को हानि पुहंचती है। अगर अब हम यह जान गए हैं तो जोखिम नहीं उठाना चाहिए।"
लंबे समय तक रोते रहने से बच्चों के मस्तिष्क में कार्टिसोल नामक रसायन पैदा होता है, इससे दिमाग को नुकसान पहुंचता है।
लेखिका ने बताया," इसका मतलब यह नहीं कि बच्चों को रोना नहीं चाहिए। सभी बच्चे रोते हैं, लेकिन कुछ बच्चे ज्यादा रोते हैं। रोना खराब नहीं होता पर उन्हें सीमा से अधिक नहीं रोना चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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