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    एक ही परिवार के 5 सदस्‍यों ने ट्रेन के आगे जान दी

    By Staff
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    परेशान परिवार ने की 'ख़ुदकुशी'
    नारायण बारेठ
    बीबीसी संवाददाता, जयपुर

    राजस्थान के करौली ज़िले में बुधवार रात पांच लोगों ने कथित तौर पर जाति पंचायत के फ़ैसले से दुखी होकर ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली. मरने वालों में एक ही परिवार के चार सदस्य हैं. लेकिन इस परिवार की 11 साल की लड़की मोना बच गई. मोना ने ही अपने परिजनों को हादसे की सूचना दी. पुलिस को घटनास्थल से खुदकुशी के दो पत्र भी मिले हैं. इसमें गांव की पंचायत की शिकायत की गई है.

    घटनास्थल का मुआयना कर लोटे करौली के ज़िला अधिकारी नीरज पवन ने बीबीसी को बताया कि मौक़े से मिले पत्रों में गजेंद्र ने अपनी कहानी बयान की है और जाति पंचायत की शिकायत की है.

    हादसे की कहनी

    उन्होंने बताया, ''पुलिस मामला दर्ज कर पंच-पटेलों की तलाश कर रही है. इस परिवार को खुदकुशी के लिए मजबूर करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं.'' पुलिस के मुताबिक़ ये हादसा बुधवार आधी रात का है. पुलिस के मुताबिक़ बाजना का गजेंद्र जाट (40) अपनी पत्नी हीरो, नौ साल की बेटी चंचल और आठ साल के बेटे रोहिताश्व के साथ दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर आकर लेट गया. उनके साथ पड़ोस की एक महिला कुँवारी बाई भी थी.

    गजेंद्र ने अपनी बेटी मोना को भी पटरी पर लिटा दिया. पुलिस के मुताबिक़ इन लोगों की देहरादून एक्सप्रेस से कटने से मौत हो गई. इस हादसे में मोना सही-सलामत बच गई. मोना ने पुलिस को बताया कि उसके भाई बहनों को नीद आ गई. लेकिन वह जग रही थी. जब उसे कुछ ठंड महसूस हुई तो वह रेल पटरी के बीच सजग होकर लेट गई. पूरी ट्रेन उसके ऊपर से गुजर गई. लेकिन वह सुरक्षित बच गई.

    पुलिस के मुताबिक़ मोना ने जब मंजर देखा तो वह हिल गई और बदहवास होकर इधर-उधर भटकती रही. किसी तरह गाँव पहुँचकर उसने अपने चाचा को घटना की जानकारी दी. इसके बाद लोग जब मौक़े पर पहुँचे तो देखा कि वहाँ क्षत-विक्षत लाशें पड़ी हैं. मौक़े से मिले पत्रों में गजेंद्र ने लिखा है कि उस पर पंच-पटेलों ने झूठा आरोप लगाया कि उसने कुँवरी बाई से 50 हजार रूपए उधर लिए हैं जिसे वह ब्याज समेत वापस करे.

    बेख़ौफ़ पंचायत

    कुंवरी बाई और गजेंद्र के स्पष्टीकरण देने पर भी पंचायत के पंच-पटेल नहीं पिघले. बीते 18 अप्रैल को गाँव में एक पंचायत हुई. इसमें गजेंद्र पर 50 हज़ार रुपए का जुर्माना लगाया गया था. गजेंद्र इससे दुखी थे. लोगों ने बताया कि गजेंद्र अपनी फ़रियाद लेकर दिन भर इधर-उधर घूमते रहे और रात में यह क़दम उठा लिया.

    मोना से मिलकर लोटे करौली के प्रमोद ने बीबीसी कहा, ''मोना का दर्द सुनकर मेरी आँखों में आँसू आ गए."" करौली के पुलिस उप अधीक्षक एमआर मीना ने बीबीसी से कहा कि शुरुआती जांच में यह एक प्रेम त्रिकोण का मामला लगता है.

    उन्होंने कहा, ''ये सही है कि मौक़े से दो पत्र मिले है. इसमें समाज या गाँव के पंच-पटेलों के ख़िलाफ़ शिकायत की गई है. लेकिन अभी कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी. हम अभी मामले की जांच कर रहे है."" पुलिस के मुताबिक़ गजेंद्र हादसे से पहले अपने ससुराल भी गया था. वहाँ से लौटते ही उसने इस काम को योजनाबद्ध तरीक़े से अंजाम दिया. राज्य के मानवाधिकार कार्यकर्ता लगातार इन जाति पंचायतों के ख़िलाफ़ क़ानून बनाने की माँग करते रहे हैं.

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