रक्त जांच से पता चलेगी दिल की बीमारी
नई रक्त जांच में गामा-प्राइम फाइब्रिनोजेन (रक्त का थक्का जमने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण अवयव) का परीक्षण होता है।
ओरिगॉन हेल्थ एंड साइंस युनीवर्सिटी (ओएचएसयू) स्कूल ऑफ मेडीसिन के प्रोफेसर व अध्ययनकर्ता डेविड एच. फैरेल कहते हैं कि ह्रदय संबंधी परेशानी के और लक्षण न दिखने पर भी रक्त में इस अवयव का ऊंचा स्तर होने का मतलब है कि दिल के दौरे की संभावना अधिक है।
फैरेल ने कहा, "हर साल 50 हजार लोगों को दिल का घातक दौरा पड़ता है।"
उन्होंने कहा, "मरने वाले करीब 250,000 मरीजों में कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य होता है और कुछ मरीजों में कोलेस्ट्राल के सामान्य स्तर के साथ गामा-प्राइम फाइब्रिनोजेन का स्तर भी बढ़ा होता है। "
दुनिया के सबसे पुराने और महत्वपूर्ण ह्रदय रोग संबंधी अध्ययन 'फ्रैमिघम हार्ट स्टडी' के 3,400 रक्त नमूनों के विश्लेषण के आधार पर फैरेल और उनके साथी शोधकर्ताओं के एक दल ने गामा-प्राइम फाब्रिनोजेन जांच की प्रभावशीलता की पुष्टि की है।
ओएचएसयू के फ्रैमिंघम नमूनों के विश्लेषण के अलावा यह देखा गया है कि मरीजों में दिल के दौरे के अन्य लक्षणों के साथ गामा-प्राइम फाब्रिनोजेन का उच्च स्तर देखा गया।
फैरेल ने कहा कि यदि गामा-प्राइम फाब्रिनोजेन का स्तर 25 प्रतिशत बढ़ जाए तो दिल के दौरे की संभावना सात गुना बढ़ जाती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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