बच्चों को सुरक्षित रखने में विफल रहा संरक्षण गृह
आगरा, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। वर्ष 2004 से 2006 के बीच आगरा के संरक्षण गृह ने 10 बच्चों को गोद लेने के इच्छुक दंपतियों के हवाले किया। इनमें से छह का इस समय पता नहीं है।
भारत में मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल के एक प्रतिनिधि और मानवाधिकार कार्यकर्ता नरेश पारस ने जुलाई 2009 में सबसे पहले इन गायब हुए बच्चों के बारे में जानने का प्रयास किया। इसके लिए उन्होंने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत अपील की। इसमें पता चला कि विभिन्न दंपतियों ने 10 बच्चों को गोद लिया जिसमें से छह का पता तक दर्ज नहीं किया गया।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के एक दल की जांच रिपोर्ट में 26 अक्टूबर 2009 को कहा गया कि बाल गृह से नौ बच्चों के गायब होने के आरोप सही हैं। इनमें से तीन बच्चों का बाद में पता चल गया।
पारस ने बताया, "चंदन (2), देवेंद्र (2), ज्योति (5), विवेक (6), पप्पू (8) और एक अनाम बच्चे को वर्ष 2004 से 2006 के बीच विभिन्न दंपतियों ने गोद लिया और संरक्षण गृह के दस्तावेजों में इनके घर के पते तक दर्ज नहीं हैं। कोई नहीं जानता कि ये बच्चे कहां हैं और किसके साथ हैं।"
पारस ने एनसीपीसीआर के सदस्य सचिव लव वर्मा को इस मामले से अवगत कराया। इसके बाद आयोग ने मामले की जांच के लिए एक जांच दल यहां भेजा और पाया कि ये आरोप सही हैं।
पारस ने बताया कि उन्होंने पुलिस, जिला प्रशासन, मानवाधिकार आयुक्त, मुख्यमंत्री, राज्यपाल यहां तक कि राष्ट्रपति के पास इसकी शिकायत भेजी लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
वह कहते हैं कि सभी ने उनकी शिकायत के आवेदन को आगे बढ़ा दिया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश में लोकतंत्र किस तरह से काम कर रहा है।
बच्चों का अब तक कोई पता नहीं चल सका है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2009 में संरक्षण गृह के एक कर्मचारी के खिलाफ तीन बच्चियों के यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया था। इन तीनों बच्चियों की उम्र 10 साल से कम थी। इस मामले की पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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