कार्बेट पार्क में हाथियों की सफारी का विरोध
ग्रामीणों के विरोध के चलते कार्बेट पार्क के निदेशक ने इसकी आख्या उपनिदेशक से देने को कहा है।
उधर विरोध की परवाह किए बगैर पर्यटन व्यवसायी और ट्रैवल एजेंट पर्यटकों के लिए इसे जरूरी बताते हुए इसको जारी रखने की मांग कर रहे हैं। इससे ग्रामीणों और पर्यटन व्यवसायियों के बीच टकराव का खतरा बढ़ रहा है।
पर्यटन व्यवसायियों का कहना है कि पर्यटकों को हाथी की सवारी खूब भाती है। हाथी सफारी की जबरदस्त मांग है। हाथी सफारी से ही बाघ दर्शन के लिए भी पर्यटक जाते हैं। इसके लिए यहां उग आए तमाम रिसॉर्ट मालिकों ने बकायदा पैकेज तैयार किए हैं। लेकिन ग्रामीणों के विरोध से इस मामले ने तूल पकड़ लिया है।
कार्बेट की बाहरी पट्टी पर पर्यटन का जबरदस्त बोलबाला है। यहां पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। पार्क के वन्यजीव पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है। पिछले दिनों दिल्ली के पूसा इंस्टीट्यूट आफ होटल मैंनेजमेंट की एक सर्वेक्षण टीम ने पार्क पर इस अंधाधुंध पर्यटन के प्रभाव पर एक रिपोर्ट केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय समेत राज्य के मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री को भी भेजी थी।
इसके बाद इस पार्क की बाहरी पट्टी पर रिसॉर्ट मालिकों द्वारा पर्यटन के नाम पर जारी गतिविधियों पर रोक की बात कही जा रही थी। लेकिन कुछ ठोस कार्ययोजना सामने नहीं आ पाई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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