विश्व बैंक कोष के इस्तेमाल में विफल रहा हिमाचल
शिमला, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। जैव विविधता का भंडार कहा जाने वाला हिमाचल प्रदेश विश्व बैंक द्वारा दिए गए वन कोष की 86 फीसदी राशि का उपयोग करने में असफल रहा है।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट के अनुसार राज्य पिछले दो साल में आवंटित कुल राशि के 21 फीसदी हिस्से का इस्तेमाल नहीं कर सका।
रिपोर्ट के अनुसार मध्य हिमालयी वॉटरशैड विकास परियोजना (एमएचडब्ल्यूडीपी)के तहत पवर्तीय आजीविका संवर्धन भाग में वित्तीय प्रदर्शन काफी खराब रहा। वर्ष 2006-09 के बीच इस मद में 42 से 86 फीसदी धन का इस्तेमाल नहीं हो सका।
वर्ष 2005-06 में 337.50 करोड़ रुपये के विश्व बैंक के सहयोग से सात वर्षो के लिए एमएचडब्ल्यूडीपी शुरू की गई थी। इसके तहत 80 फीसदी राशि ऋणदाता और 20 फीसदी राज्य सरकार द्वारा खर्च किए जाने का प्रावधान है।
इस परियोजना के चार बिंदु संस्थागत मजबूती, वॉटरशैड का विकास और प्रबंधन, पहाड़ों पर रहने वालों की दशा सुधारना और परियोजना समन्वय हैं।
कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि पहाड़ों पर रहने वालों की दशा सुधारने के तहत दी गई राशि का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाने के लिए राज्य का वन विभाग जिम्मेदार है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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