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अंसारी बंधु बसपा से निष्कासित

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    अंसारी बंधु बसपा से निष्कासित

    रामदत्त त्रिपाठी

    बीबीसी संवाददाता, लखनऊ

    सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी यानी बसपा ने जेल में बंद विधायक मुख़्तार अंसारी और उनके भाई अफ़ज़ल अंसारी दोनों को आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में पार्टी से निकाल दिया है.

    साथ ही मुख़्तार अंसारी के तीसरे भाई सिबग़ातुल्ला अंसारी का समर्थन न लेने का फ़ैसला किया है. सिबग़ातुल्ला अंसारी ग़ाज़ीपुर विधानसभा से निर्दलीय विधायक हैं और अफ़ज़ल अंसारी सांसद रह चुके हैं.

    पाँच वर्षों से जेल में बंद मुख़्तार अंसारी पिछले लोकसभा चुनाव में वाराणसी से बसपा के प्रत्याशी थे. चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री मायावती उन्हें ग़रीबों का मसीहा बताई थीं और उन्हें वोट देने के लिए जनता से अपील की थीं.

    हाल ही में ग़ाज़ीपुर जेल की बैरक में उन्हें सुख-सुविधा के तमाम साजो-सामान मिलने के कारण पहले मथुरा और फिर आगरा जेल भेज दिया गया.

    पार्टी की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि मुख़्तार अंसारी और उनके भाइयों ने बसपा में शामिल होने के बाद अपने आचरण में सुधार का वादा किया था, लेकिन उन्होंने उस पर अमल नहीं किया और अब भी आपराधिक गतिविधियों में लिप्त हैं. इसलिए मुख़्तार और उनके भाई अफ़ज़ल को पार्टी से निकाल दिया गया है.

    छवि सुधारने की छटपटाहट

    इससे पहले उन्नाव से बसपा की टिकट पर लोकसभा लड़ चुके अरुण शंकर शुक्ल को इसी आरोप के तहत पार्टी से निकाल दिया गया था.

    दो दिन पहले गोंडा ज़िले में डीएम कंपाउंड में बसपा की रैली के दौरान मंच पर बैठे बसपा के एक स्थानीय नेता हनुमान शरण शुक्ल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस नेता का लंबा आपराधिक इतिहास था.

    इस घटना से बसपा और सरकार दोनों की किरकिरी हुई, तब सरकार ने सफाई दी कि मृत नेता हनुमान शरण बसपा का सदस्य नहीं थे.

    वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री मायावती ने ये वादा किया था कि अपराधियों पर पूर्ण नियंत्रण किया जाएगा. उनका मुख्य नारा था ‘चढ़ गुंडों की छाती पर बटन दबाओ हाथी पर.’

    लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री बनने का सपना पूरा करने के लिए मायावती ने बड़े पैमाने पर आपराधिक छवि वाले नेताओं को टिकट दी, फिर भी बसपा की सीटें नहीं बढीं.

    जानकारों का कहना है कि जब कांग्रेस और अन्य विरोधी दलों ने अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी में बसपा के ख़िलाफ़ अभियान तेज़ कर दिया है, तो मुख्यमंत्री मायावती ने अपनी सरकार की बिगड़ती छवि सुधारने के लिए मुख़्तार अंसारी जैसे माफ़िया को पार्टी से निकालने की कार्यवाही शुरू की है.

    मगर राजनीतिक जानकारों के अनुसार इस तरह की कार्यवाही से छवि में सुधार की उम्मीद कम ही है, क्योंकि अभी भी बड़ी तादाद में माफ़िया नेता बसपा और सरकार में मौजूद हैं.

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