'भीख मांगने को मजबूर बच्चे'

'भीख मांगने को मजबूर बच्चे'
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने आरोप लगाया है कि अफ़्रीकी देश सेनेगल में मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों के साथ दुर्व्यवहार होता है, उन्हें पीटा जाता है और उनके साथ ग़ुलामों जैसा व्यवहार किया जाता है. संगठन के मुताबिक सेनेगल की सरकार इस तरह के शोषण से निपटने के लिए बनाए गए कानूनों को अमल में नहीं ला रही है.

ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि हर दिन कम से कम 50 हज़ार बच्चों को भीख मांगने के लिए मजबूर किया जाता है. भीख मांगने वालों में अधिकतर बच्चों की उम्र 12 वर्ष से कम होती है और कुछ बच्चों की उम्र तो चार वर्ष पाई गई. संस्था का आरोप है कि कुछ शिक्षकों ने भीख में मिले पैसों की बदौलत हर साल करीब एक लाख डॉलर तक की कमाई की है. ये शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के नाम पर उनका आर्थिक शोषण करते हैं.

सेनेगल के मुस्लिम-बहुल समाज में मदरसों में पढ़ाने वाले शिक्षकों का काफ़ी दबदबा है. ज़्यादातर परिवार चाहते हैं कि उनके बच्चों को धार्मिक और नैतिक शिक्षा मिले और वो उन्हें इन स्कूलों में भेजते हैं. लेकिन कुछ परिवारों को अपने बच्चों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार के बारे में कभी भी पता ही नहीं चल पाता. कई परिवार ये जानने के बावजूद ऐसे शिक्षकों के पास भेजते हैं.

संस्था का ये भी कहना है कि स्कूलों में ऐसे भी कई शिक्षक हैं जो बच्चों का ध्यान रखते हैं और उनके साथ अच्छा व्यवहार करते हैं. ह्यूमन राइट्स वॉच ने सेनेगल के अधिकारियों से कहा है कि वो ऐसे स्कूलों को नियंत्रित करें और उन शिक्षकों के खिलाफ़ कार्रवाई करें जो बच्चों का शोषण करते हैं और उन्हें भीख मांगने के लिए मजबूर करते हैं. पाँच वर्ष पहले सेनेगल की सरकार ने एक क़ानून पास किया था जिसके मुताबिक आर्थिक फ़ायदे के लिए किसी को भीख मांगने पर मजबूर करने पर कार्रवाई हो सकती है. ह्यूमन राइट्स वॉच ने सेनेगल के अधिकारियों से कहा है कि वो इस क़ानून के अंतर्गत दोषियों पर कार्रवाई करें.

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