मंदिर आंदोलन के लिए 9 अप्रैल को विरोध दिवस (लीड-2)

हरिद्वार, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) द्वारा मंगलवार को आयोजित संत सम्मेलन में साधु-संतों ने गाय, गंगा और मंदिर को लेकर आंदोलन करने का एक बार फिर संकल्प लिया और इस सिलसिले में नौ अप्रैल को देश भर में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की।

संतों ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए फिर से आंदोलन किया जाएगा और इस आंदोलन का राजनीतिक लाभ अब किसी भी दल को नहीं लेने दिया जाएगा, चाहे वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ही क्यों न हो।

मंदिर आंदोलन के सिलसिले में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की ओर से नौ अप्रैल को देश भर में विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम अयोजित किया गया है।

विरोध का कार्यक्रम सुबह से लेकर दो बजे तक चलेगा। इस दौरान साधु-संत मंदिर निर्माण के लिए शक्ति संचय हेतु मौन साधना करेंगे और हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे।

संतों ने कहा कि मंदिर निर्माण के मात्र दो रास्ते हैं। या तो मुस्लिम समुदाय इससे संबंधित सभी मुकदमे वापस ले ले, या फिर संसद में इसके लिए कानून पारित किया जाए।

इसके पहले विहिप के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल ने राम मंदिर निर्माण में हो रही देरी के लिए सीधे तौर पर भाजपा के शीर्ष नेता लाल कृष्ण आडवाणी को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि आडवाणी ने यदि रथ यात्रा न निकाली होती तो अब तक मंदिर का निर्माण हो चुका होता।

सिंघल ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा, "रथ यात्रा ने राम मंदिर आंदोलन को क्षति पहुंचाई। आडवाणी ने रथ यात्रा निकालकर एक गलत कदम उठाया था, नहीं तो अब तक मंदिर बन गया होता।"

उन्होंने कहा, "आडवाणी ने रथ यात्रा निकालकर मंदिर आंदोलन का राजनीतिकरण कर दिया। उन्हें यह नहीं करना चाहिए था। यात्रा निकालने से पहले उन्होंने हमसे पूछा भी नहीं था। यात्रा निकालने की बजाय भाजपा ने यदि तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस ले लिया होता तो उसे राजनीतिक तौर पर उतना ही फायदा पहुंचता, जितना उसे राम मंदिर आंदोलन से पहुंचा।"

उल्लेखनीय है कि राम मंदिर आंदोलन को हवा देने के लिए आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या तक की रथ यात्रा निकाली थी। इस यात्रा के बाद आडवाणी और भाजपा को बहुत बड़ा राजनीतिक लाभ मिला था।

सिंघल ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन को उस वक्त कई राजनीतिक दलों ने समर्थन दिया था, लेकिन किसी ने भी इस आंदोलन को अपने हाथ में नहीं लिया क्योंकि यह राजनीतिक मुद्दा नहीं था बल्कि साधु-संतों का मामला था।

उन्होंने विश्वास जताया कि जल्द ही राम मंदिर का निर्माण होगा और इसके लिए साधु-संत जन जागरण करेंगे। उन्होंने कहा कि जिस तरह से राम सेतु और अमरनाथ यात्रा को लेकर देश में आंदोलन हुआ, उसी तर्ज पर राम मंदिर के मुद्दे पर जनमानस को तैयार किया जाएगा।

गौरतलब है हरिद्वार में सोमवार से विहिप के केन्द्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक चल रही है। बैठक के पहले दिन विहिप की ओर से स्पष्ट किया गया था कि राम मंदिर का निर्माण अदालत या मुस्लिम समुदाय से बातचीत के जरिए नहीं हो सकता है।

सिंघल ने कहा, "मुस्लिम समाज नहीं चाहता कि अयोध्या में राम मंदिर बने। अब उनसे कोई बातचीत नहीं होगी। रही अदालत की बात, वह उसके फैसले से यह संभव ही नहीं है। फैसला हमारे पक्ष में आएगा तो मुस्लिम समुदाय इसे स्वीकार नहीं करेगा और उसके पक्ष में आएगा तो यह हमें मान्य नहीं होगा। इसलिए अब एकमात्र रास्ता यही है कि संसद में कानून पारित कराकर गुजरात के सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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