चीन, भारत वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना करें : कृष्णा (लीड-1)

चीन के चार दिवसीय दौरे पर पहुंचे कृष्णा ने 'चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज' (सीआईआईएस) में '21वीं सदी की दुनिया में भारत और चीन' विषय पर एक संबोधन में कहा कि दोनों देशों को वैश्विक चुनौतियां का सामना एक साथ करना चाहिए।

कृष्णा ने कहा, "हम अपनी समस्याओं से कैसे निपटते हैं, यह हमारी परिपक्वता का असली परीक्षण है। अनसुलझे सीमा विवाद को लेकर सवाल उठता है और अक्सर मीडिया में अटकलों का विषय होता है। हर समय यह कहना उपयुक्त नहीं होता कि वास्तव में इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।"

चीन के साथ प्रतिस्पर्धात्मक रिश्तों से इंकार करते हुए कृष्णा ने बीजिंग से लंबे समय से जारी अपने रुख की समीक्षा करने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता के भारत के दावे का समर्थन करने को कहा।

विदेश मंत्री ने चीन के थिंक टैंक सीआईआईएस में कहा, "वास्तव में संयुक्त राष्ट्र में सुधार जटिल मुद्दा होने के बावजूद शायद चीन के लिए यह समय अपनी स्थिति की समीक्षा करने का और सुरक्षा परिषद में ऐसे देश की उपस्थिति का स्वागत करने का है, जो काफी हद तक उसके समान है।"

चीन ने अभी तक सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता के भारत के दावे का समर्थन नहीं किया है और उसका इरादा अंतर्राष्ट्रीय मामलों में भारत की बड़ी भूमिका का समर्थन करने से बचने का है।

भारत को उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित होने की 60वीं वर्षगांठ के मौके पर चीन भारत के दावे का समर्थन करने की पहल करेगा।

भारत-चीन संबंधों को व्यापक वैश्विक संदर्भ में रखते हुए कृष्णा ने अंतर्राष्ट्रीय नीति निर्माण संस्थाओं को लोकतांत्रिक बनाने के लिए दोनों देशों के बीच वैश्विक साझेदारी बढ़ाने को कहा।

कृष्णा ने कहा, "निश्चित रूप से वैश्विक मुद्दों पर एशिया के दो बड़े विकासशील देशों भारत और चीन के बीच साझेदारी एक मजबूत घटना है।"

चीन और भारत के बीच प्रतिस्पर्धा की बात को खारिज करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के नेताओं को ठोस सहयोग के माध्यम से ऐसी स्थितियों का खंडन करना चाहिए।

कृष्णा ने कहा कि भारत सरकार और भारत की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा मानता है कि चीन और भारत में बहुत अधिक समानता है। दोनों देशों को एक साथ मिलकर वैश्विक मामलों में अधिक प्रभावशाली भूमिका के लिए प्रयास करना चाहिए।

पिछले वर्ष भारतीय मीडिया के चीन विरोधी रुख के बारे में चर्चा पर कृष्णा ने कहा कि भारतीय मीडिया स्वतंत्र है और स्पष्ट बोलना कभी-कभी बहुत आलोचनात्मक हो जाता है।

कृष्णा गुरुवार तक चीन में रहेंगे और भारत तथा चीन के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 60 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कई समारोहों में हिस्सा लेंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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