उल्फा प्रमुख के ससुर चुनाव लड़ेंगे

बागानपारा (असम), 24 मार्च (आईएएनएस)। वर्षो तक असम को स्वतंत्रता दिलाने की कोशिश करने और छुपकर जीवन बिताने वाले उल्फा प्रमुख अरबिंद राजखोवा के ससुर प्रहलाद दास अपने दामाद से इत्तेफाक नहीं रखते हैं और अब वह एक स्थानीय परिषद का चुनाव लड़ने जा रहे हैं।

दास असम में अगले महीने होने वाले बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद (बीटीसी) के चुनावों में स्वतंत्र उम्मीदवार के बतौर चुनाव लड़ेंगे। उनकी बेटी काबेरी कछारी राजकुंवर प्रतिबंधित 'युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम' (उल्फा) प्रमुख अरबिंद राजखोवा की पत्नी है।

दास ने आईएएनएस से कहा, "मैं अपने क्षेत्र के स्थानीय लोगों के कहने पर चुनाव लड़ रहा हूं।"

वह गुवाहाटी से 120 किलोमीटर दूर स्थित बक्सा जिले के बागानपारा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। चालीस सदस्यीय राजनीतिक-प्रशासनिक ढांचे बीटीसी के लिए चुनाव नौ अप्रैल को होना है। वर्ष 2003 में केंद्र सरकार और अब भंग हो चुके 'बोडोलैंड लिबरेशन टाइगर्स' के बीच हुए बोडो समझौते के तहत बीटीसी के गठन का निर्णय लिया गया था।

अपने निर्वाचन क्षेत्र में चुनावी सभाएं करने में व्यस्त दास ने कहा, "मैंने अपनी बेटी या दामाद से चुनाव लड़ने के विषय में कभी भी बात नहीं की है।"

काबेरी संप्रभुता या स्वतंत्रता की कट्टर समर्थक है। उल्फा स्वतंत्रता की इस मांग को लेकर 1979 से एक युद्ध चला रहा है।

काबेरी का कहना है, "हम स्वतंत्रता चाहते हैं और हमारी संप्रभुता की मांग में कुछ भी गलत नहीं है।" लेकिन उनके पिता का भारतीय संविधान में भरोसा है। दास हाल ही में असम सरकार के प्रखंड विकास अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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