कोलकाता अग्निकांड पीड़ितों में ज्यादातर युवा पेशेवर
कबिता और सैलेन बारिक की इकलौती संतान सौरव ने कुछ समय पहले ही रावत इंजीनियर्स में कॉल सेंटर की नौकरी शुरू की थी। उत्तर 24 परगना के इच्छापुर निवासी सौरव ने आग की तपिस और दमघोटू धुएं को न बर्दास्त कर पाने की स्थिति में चौथी मंजिल पर स्थित अपने कार्यालय से छलांग लगा दी थी। परिणास्वरूप उसकी मौत हो गई थी।
जिस अस्पताल में सौरव का शव रखा गया था, वहां उपस्थित उसके एक सहकर्मी ने कहा, "सांस ले पाना कठिन हो गया था। हमारी आंखों के सामने हमारे एकाउंट आफिसर प्रदीप कुमार चौखानी की दम घुटने से मौत हो गई। सौरव ने शायद यही सोचा कि मौत से बचने का एक मात्र रास्ता छलांग लगाना ही है। उसने वैसा ही किया।"
सौरव की मां की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। "आखिर उसने छलांग क्यों लगाई? क्या उसे पता नहीं था कि इतनी ऊंचाई से छलांग लगाने के बाद कोई बच नहीं सकता।"
एक काल सेंटर में कार्यरत 30 वर्षीय विवेक उपाध्याय इस हादसे के पहले पीड़ित थे। उसने भी आग की लपटों से बचने के लिए इमारत की पांचवी मंजिल पर स्थित अपने कार्यालय से छलांग लगा दी थी और गंभीर चोटें आने के कारण उसकी मौत हो गई थी।
उपाध्याय दक्षिणी कोलकाता के पांडित्य रोड पर रहते थे। तीन साल पहले ही उनकी शादी हुई थी। उपाध्याय की मां मंगलवार को एस.एस.के.एम. अस्पताल में हर किसी से यही पूछ रही थी, "मेरा मुन्ना ठीक है ना? रिश्तेदार विवेक के मौत की खबर उसकी मां को नहीं देना चाहते थे।"
एक रिश्तेदार ने उसकी मां से कहा, "न न, वह घर चला गया। हम लोगों को भी घर चलना चाहिए।" देर रात को बेटे की मौत की खबर मां को दी गई।
इसके अलावा सोनाली सिंह नामक महिला अपने 22 वर्षीय भाई बिद्युत आचार्य की एक तस्वीर हाथ में लेकर इमारत के इर्द-गिर्द चक्कर काट रही थी। उसका भाई मंगलवार से लापता था। वह काल सेंटर कंपनी, विल्टेक कंप्यूटर में काम करता था।
कोलकाता नगर निगम के आंकड़े के अनुसार इमारत में 128 व्यापारिक प्रतिष्ठान और कार्यालय थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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