परमाणु दायित्व विधेयक देश की जरूरत है : फिक्की

मित्तल ने कहा, "भारत में ऊर्जा की बहुत दरकार है। यह दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है। एक समय के बाद इसे संभाल पाना मुश्किल होगा।" उन्होंने कहा, "अमेरिकी कंपिनयों की भी नजर आणविक नुकसान के लिए नागरिक दायित्व विधेयक पर टिकी हैं। क्योंकि यह ऐसा क्षेत्र है जिसमें भारत में निवेश के द्वार खुलेंगे।"
वाम दलों ने इस विधेयक पर आपत्ति जतायी है कि इससे अमेरिकी कंपनियों को छूट मिलेगी, इस पर मित्तल ने कहा कि इस विधेयक में 10 करोड़ डॉलर की सीमा निर्धारित है। उन्होंने कहा, "दायित्व की सीमा कितनी हो, इस बारे में मैं कुछ नहीं कहना चाहूंगा। यह तय करना सरकार का काम है। यह सिर्फ अमेरिका के लिए ही नहीं बल्कि वैश्विक है।"
उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार कोई न कोई रास्ता निकाल लेगी। मित्तल ने कहा, "हर कोई रिएक्टर तैयार कर रहा है। परमाणु ऊर्जा के मद्देनजर भारत बहुत आगे निकल सकता है।" यह पूछे जाने पर कि विधेयक के संसद से पारित होने में हो रही देरी से अमेरिकी कंपनियां निराश हैं, उन्होंने कहा, "वे भारत के मसलों को अच्छी तरह समझती हैं। वे यह भी समझती हैं कि लोकतंत्र में उन्हें भी सावधान रहना चाहिए।" उन्होंने कहा कि ऊर्जा के अलावा रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग के व्यापक आसार हैं।












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