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मुसलमानों के लिए आरक्षण की मांग

By Jaya Nigam
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मुसलमानों के लिए आरक्षण की मांग

अब्दुल वाहिद आज़ाद

बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए, दिल्ली से

भारत में मुस्लिम आरक्षण की मांग को लेकर विभिन्न मुस्लिम संगठनों ने दिल्ली के जंतर मंतर पर विशाल रैली की है.

लेकिन दिलचस्प बात यह है कि आरक्षण के मुद्दे पर मुस्लिम संगठनों में मतभेद भी दिखे और अशरफ़ बनाम अजलाफ़ की लड़ाई खुल कर सामने आ गई.

सोमवार को जंतर मंतर पर आरक्षण की मांग को लेकर एक ही समय में दो अलग-अलग रैलियां की गईं.

जहाँ दक्षिण भारत की एक प्रमुख मुस्लिम संगठन पोपुलर फ़्रट ऑफ़ इंडिया के बैनर तले सारे मुसलमानों के लिए आरक्षण की मांग को लेकर संसद मार्च का आयोजन किया गया वहीं ऑल इंडिया पसमांद मुस्लिम महाज़ ने सिर्फ़ पिछड़े मुसलमानों के लिए आरक्षण की वकालत की.

हालांकि दोनों रैलियों में एक बात समान रूप से कही गई और वो यह कि देश में विकास की दौड़ में मुसलमान पिछड़ चुके हैं और उनके सशक्तिकरण की ज़िम्मेदारी सरकार पर है. दोनों रैलियों को अनेक बड़े मुस्लिम नेताओं, सांसदों और राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों ने संबोधित किया.

पोपुलर फ़्रंट ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष ईएम अब्दुर रहीम का कहना था कि जस्टिस रंगनाथ मिश्र आयोग की रिपोर्ट ने मुसलमानों के पिछड़ेपन के इलाज के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की सिफ़ारिश की है और उसे हर हाल में लागू किया जाना चाहिए.

उनका कहना था, "संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में मुस्लिम आरक्षण की बात कही थी, लेकिन फ़िलहाल ख़ामोश बैठी हुई है."

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मुसलमानों के साथ जानबुझकर भेदभाव जारी रखना चाहती है इसलिए मुसलमानों के आरक्षण के मुद्दे पर चुप है.

अब्दुर रहीम का कहना था, "सारे मुसलमानों को आरक्षण दिया जाए, लेकिन ऐसे प्रवाधान किए जाएंगे कि मुसलमानों में जो अधिक पिछड़े हैं उसे आरक्षण का फ़ायदा पहले पहुंचे."

जबकि ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ के नेता और जनता दल युनाइटेड के सांसद अली अनवर ने सारे मुसलमानों के आरक्षण की मांग को ख़ारिज करते हुए कहा कि सिर्फ़ पिछड़े मुसलमानों को आरक्षण दिया जाए.

उनका कहना था,"पिछड़ापन जाति के आधार पर है न कि धार्मिक आधार पर है. इसलिए धार्मिक आधार पर आरक्षण की मांग एक जज़्बाती फ़ैसला है."

अली अनवर ने कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण मिलने से देश का सांप्रदायिक महौल बिगड़ जाएगा.

पोपुलर फ़्रंट ऑफ़ इंडिया की रैली को जानेमाने मुस्लिम नेता सैयद शहाबुद्दीन ने भी संबोधित किया और कहा कि मुस्लमानों की तरक़्की के लिए आरक्षण ही एक उपाय है और ये मुसलमानों का वाजिब हक़ है.

जनता दल युनाइटेड के अध्यक्ष शरद यादव ने ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ की रैली में कहा कि वो मुस्लिम आरक्षण का समर्थन करते हैं और मुसलमानों के पिछड़े वर्गों के विकास पर ज़ोर देने की आवश्यकता है.

आरक्षण के सवाल पर दो गुटों की अलग-अलग मांग से ज़ाहिर है कि अशरफ़ और अजलाफ़ का मतभेद आने वाले दिनों में और अधिक गहरा होगा लेकिन इस बात से किसी को इनकार नहीं है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में देश की सबसे बड़ी अक़्क़लियित सबसे अधिक अभावग्रस्त है और उनकी वास्तविक तरक़्क़ी के बिना देश का विकास मुमकिन नहीं है.

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