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सू ची:चुनाव में हिस्सा लेने पर रोक

By Jaya Nigam
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सू ची:चुनाव में हिस्सा लेने पर रोक

बर्मा की सैन्य सरकार ने एक नया चुनावी क़ानून बनाया है जिसके तहत आंग सांग सू ची पर पाबंदी लगा दी गई है कि वो किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ सकती.

लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सांग सू ची विपक्षी दल नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी की नेता हैं. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि नए क़ानून का मतलब होगा कि वो प्रस्तावित चुनाव के दौरान चुनावी प्रचार में भी हिस्सा नहीं ले सकतीं.

नए क़ानून के अंतरगत अगर किसी व्यक्ति के ख़िलाफ़ आपराधिक आरोप हैं तो वो किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ सकता.

पिछले करीब 20 सालों से सू ची किसी न किसी आरोप के कारण हिरासत में रही हैं. 1990 में बर्मा में चुनाव जीतने के बाद से ही वे ज़्यादातर हिरासत में रही.

किसी भी राजनीतिक पद पर रहने को लेकर पहले से ही सू ची पर रोक है. संविधान के तहत जिन लोगों के जीवनसाथी विदेशी हैं वे राजनीतिक पद पर नहीं रह सकते. सू ची के पति ब्रितानी हैं.

सू ची की पार्टी एनएलडी के उप अध्यक्ष टिन ऊ ने कहा है कि ये अतिवादी क़ानून हैं.उन्होंने पत्रकारों से कहा कि नए क़ानून राजनीति से प्रेरित हैं.

सैनिक सरकार ने पिछले साल कहा था कि बर्मा में चुनाव करवाए जाएँगे. लेकिन अब तक कोई तारीख़ तय नहीं की गई है.

नए क़ानून के तहत राजनीतिक पार्टियों को आदेश दिया गया है कि वे ऐसे लोगों को नकार दें जो पार्टी सदस्यता के काबिल नहीं है.

इसके अलावा प्रशासनिक अधिकारियों और धार्मिक संगठनों से जुड़े लोगों के भी राजनीतिक पार्टियों में शामिल होने पर मनाही है.

2007 में सेना विराधी प्रदर्शनों के पीछे बौद्ध भिक्षुओं का बड़ा हाथ था.

पार्टी के सामने बड़ी मुश्किल

बीबीसी संवाददाता रेचल हार्वी का कहना है कि अब ऐसा लगता है कि सू ची अपनी ही पार्टी की अगुआई नहीं कर पाएँगी और न ही प्रचार में हिस्सा ले सकेंगी.

संवाददाता का कहना है कि एनएलडी पार्टी के सामने अब कठिन विकल्प हैं- या तो अपनी ही नेता को निष्काषित करे ताकि पार्टी चुनाव में हिस्सा ले सके या फिर चुनाव में हिस्सा न ले.

एनएलडी प्रवक्ता नयान विन ने कहा है कि पार्टी को स्पष्ट जवाब देना होगा लेकिन अभी ये तय नहीं हुआ है कि जवाब कैसे दिया जाए.

उन्होंने कहा, "अभी मैं इतना ही कह सकता हूँ कि क़ानून का काम संविधान की रक्षा करना होता है. हमारे लिए बड़ी समस्या खड़ी हो गई है क्योंकि वे हमसे ऐसे संविधान का पालन करने के लिए कह रहे हैं जिसे हम मानते नहीं है."

सोमवार के बाद से अब पार्टियों के पास 60 दिन है जिस दौरान वे चुनावी समिति के समक्ष पंजीकरण करवा सकते हैं.

ये स्पष्ट कर दिया गया है कि समिति के सदस्य सैन्य शासन नियुक्त करेगा.

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